PM Modi-Putin Meeting Agenda: 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, 11 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रक्षा वार्ता होने जा रही है। इस बैठक में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम (S-400 Air Defence System) की लंबित पांचवीं रेजिमेंट की डिलीवरी और नेक्स्ट-जनरेशन ब्रह्मोस (BrahMos-NG) मिसाइल के अपग्रेडेशन पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। रूस-भारत रक्षा संबंधों को केवल हथियारों की खरीद-बिक्री से आगे बढ़ाकर संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और तीसरे मित्र देशों को निर्यात की दिशा में मोड़ने की तैयारी है।
मोदी-पुतिन मीटिंग के एजेंडे में क्या-क्या?
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अंतिम (5वीं) रेजिमेंट
- भारत ने 2018 में रूस के साथ लगभग 5.43 अरब डॉलर (करीब 40,000 करोड़ रुपये) में S-400 की 5 रेजिमेंट/स्क्वाड्रन का सौदा किया था।
- रूस अब तक 4 स्क्वाड्रन की आपूर्ति कर चुका है, जिन्हें पंजाब, राजस्थान, जम्मू और उत्तरी (चीन) सीमाओं पर तैनात किया गया है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण 5वीं स्क्वाड्रन की डिलीवरी में देरी हुई थी, जिसे अब नवंबर 2026 तक भारत को सौंपने का आश्वासन दिया गया है।
- भारत 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन (लगभग 50,000 करोड़ रुपये से अधिक) खरीदने पर भी विचार कर रहा है, जिससे भारत का कुल S-400 बेड़ा बढ़कर 10 स्क्वाड्रन हो सकता है।
ब्रह्मोस-NG मिसाइल अपग्रेड
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुष्टि की कि भारत और रूस पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त उत्पादन कर रहे हैं और अब इसे अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावी बनाने के लिए नई क्षमताओं के साथ अपग्रेड करने का समय आ गया है।
ब्रह्मोस-NG की खासियतें
- हल्की व छोटी: वर्तमान ब्रह्मोस मिसाइल का वजन करीब 2.9 टन है। नया वैरिएंट ब्रह्मोस-NG महज 1.3 टन का होगा।
- तेज और दूर तक मार: इसकी गति मैक 3.5 (Mach 3.5) और रेंज 400 किलोमीटर से अधिक होगी।
- अन्य लड़ाकू विमानों में एकीकरण: हल्के वजन के कारण इसे तेजस (Tejas) और मिग-29 (MiG-29) जैसे लड़ाकू विमानों पर भी आसानी से तैनात किया जा सकेगा।
Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट
रूस द्वारा भारत को अपने 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57 की पेशकश किए जाने की भी उम्मीद है। रूस इस विमान के लिए भारत के साथ तकनीक साझा करने और संयुक्त उत्पादन की इच्छा जता चुका है।
भारत-रूस के लिए क्या मायने?
वर्ष 2021-2025 के दौरान भारत के कुल प्रमुख रक्षा आयात में रूस की हिस्सेदारी 40% रही है (जो पहले 51% थी)। ब्रह्मोस मिसाइल का पहला विदेशी ग्राहक फिलीपींस बन चुका है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अन्य देश इसे खरीदने की कतार में हैं। यह बैठक पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच बिश्केक (SCO शिखर सम्मेलन) में हुई हालिया मुलाकात के तुरंत बाद हो रही है, जो भारत और रूस के बीच मजबूत और निरंतर रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है।
