भारतीय वायुसेना में नए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी अब उसकी परिचालन क्षमता पर असर डाल रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने शनिवार को कहा कि लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या के बीच नए विमानों की आपूर्ति में अत्यधिक देरी चिंता का विषय है। खासतौर पर तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी से वायुसेना को नुकसान हो रहा है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
94वें वायुसेना दिवस से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि वायुसेना को अगले कुछ वर्षों तक हर साल कम से कम 36 से 40 लड़ाकू विमानों की जरूरत है, ताकि मौजूदा कमी को रोका जा सके और लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या फिर बढ़ाई जा सके।
अभी 30 स्क्वाड्रन, लक्ष्य 42
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास करीब 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं,जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। उन्होंने कहा कि वायुसेना को हर साल करीब दो लड़ाकू स्क्वाड्रन शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि हर साल 36-40 विमानों का उत्पादन और वायुसेना में शामिल होना जरूरी है। इससे मौजूदा गिरावट को रोककर धीरे-धीरे 42 स्क्वाड्रन के लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक जरूरत इससे भी ज्यादा हो सकती है।तेजस की डिलीवरी में देरी पर चिंता
एयर चीफ मार्शल सिंह ने तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी को लेकर साफ तौर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसमें अतिरिक्त देरी हुई है और इसका वायुसेना पर असर पड़ना तय है। फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ करीब 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था। इसके तहत वायुसेना के लिए 83 तेजस एमके-1ए विमानों की खरीद होनी थी। इनकी पहली खेप मार्च 2024 में मिलनी थी, लेकिन अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिला है।इसके बाद सितंबर 2025 में सरकार ने HAL के साथ करीब 62,370 करोड़ रुपये का एक और समझौता किया था, जिसके तहत 97 तेजस एमके-1ए विमान खरीदे जाने हैं।
114 राफेल की डील पर निगाह
वायुसेना को उम्मीद है कि राफेल विमानों की खरीद और तेजस की डिलीवरी से आने वाले वर्षों में लड़ाकू क्षमता मजबूत होगी। भारत ने फरवरी में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह खरीद फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित है। कीमत और अन्य अहम मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है तो MRFA सौदा मौजूदा वित्त वर्ष में पूरा हो सकता है। हालांकि उन्होंने इसे दोतरफा प्रक्रिया बताया और कहा कि अंतिम फैसला बातचीत पूरी होने पर होगा।
पाकिस्तान-चीन के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर पर भी चिंता
वायुसेना प्रमुख ने पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर सहयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने इसे चिंता का विषय बताया, लेकिन साथ ही कहा कि भारत के पास अपनी क्षमताएं हैं और किसी एक प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह निर्भरता नहीं है। उनके मुताबिक वायुसेना की भविष्य की योजना में तेजस एमके-1ए, MRFA के तहत विमान, तेजस एमके-2 और AMCA जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।AMCA में देरी हुई तो दूसरे विकल्प पर विचार
भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA में अगर देरी होती है तो वायुसेना को दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि रूस ने Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर AMCA कार्यक्रम में देरी होती है तो दूसरे विकल्पों को देखना पड़ सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद थिएटर कमांड पर नई चर्चा
वायुसेना प्रमुख ने थिएटर कमांड को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना थिएटर कमांड के खिलाफ नहीं है और इस प्रक्रिया में लगातार चर्चा का हिस्सा रही है। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद थिएटराइजेशन को लेकर चर्चा ने कुछ अलग दिशा ली है। उनके मुताबिक ऑपरेशन के दौरान मिले प्रत्यक्ष अनुभवों को भी अब इन चर्चाओं में शामिल किया जा रहा है।
AI के साथ बढ़ानी होगी वायुसेना की क्षमता
आधुनिकीकरण को लेकर एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि वायुसेना को AI-augmented force बनाना होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण फैसले इंसान ही लेते रहेंगे।उन्होंने भारत में लड़ाकू विमान के इंजन के निर्माण की जरूरत पर भी जोर दिया।अलग ड्रोन फोर्स बनाने की योजना नहीं
एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस दौरान ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर और वायुसेना की तैयारी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भले ही ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है, बावजूद इसके वायुसेना अलग से कोई ड्रोन फोर्स बनाने पर विचार नहीं कर रही है। कहा कि ड्रोन वायुसेना के लिए कोई अलग क्रांतिकारी श्रेणी नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं के विकास का हिस्सा हैं।
