प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन बेटिंग, गेमिंग और साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की है। ED के मुंबई जोन-2 ने 13 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद में कुल 20 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच से जुड़े कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और दूसरे अहम सबूत बरामद कर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, संबंधित लोगों और संस्थाओं के कई बैंक खातों को फ्रीज करने के आदेश भी दिए गए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय
दो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी की जांच
ED की यह जांच ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म All Panel Exchange और MGM91 से जुड़े दो मामलों के आधार पर शुरू हुई। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया और बाद में उनके साथ ठगी की गई। जांच में ED को पता चला कि इन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से जुटाई गई रकम को कई बैंक खातों और कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया। आखिरकार, यह पैसा पुणे की एक कंपनी के बैंक खातों तक पहुंचा, जिसे राम यू. रामधानी ने स्थापित किया था।
iPaisa के जरिए 200 से ज्यादा कंपनियां जुड़ीं
ED की जांच के मुताबिक, रामधानी की कंपनी Edsom Fintech Pvt. Ltd. ने 'iPaisa' नाम से अपना पेमेंट इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म विकसित किया था। इसके जरिए 200 से ज्यादा कथित शेल और फ्रंट कंपनियों को जोड़ा गया था। इन्हें आंतरिक तौर पर 'मर्चेंट्स' कहा जाता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग और साइबर ठगी से जुड़े ऑपरेटरों और उनके एजेंटों के लिए पैसों के लेन-देन में किया जाता था। इस नेटवर्क के जरिए ठगी से मिली रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसके असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
दुबई से भी नेटवर्क को निर्देश मिलने का खुलासा
ED के मुताबिक, जांच में कई म्यूल बैंक खातों का पता चला है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया गया। एजेंसी ने बेटिंग प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने वाले लोगों और रकम के लेन-देन में इस्तेमाल की गई कथित शेल कंपनियों की पहचान भी की है।
जांच में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म चलाने वाले कई लोगों को दुबई में मौजूद कुछ व्यक्ति निर्देश दे रहे थे। ED ने कुछ सहकारी बैंकों के बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल की बात भी कही है, जिनके जरिए कथित तौर पर अवैध रकम जमा करने और उसे अलग-अलग खातों में भेजने का काम किया गया।
तीन रास्तों से बाहर भेजी जा रही थी ठगी की रकम
ED की जांच में कथित तौर पर अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के तीन प्रमुख तरीके सामने आए हैं। पहला, व्यापारिक लेन-देन दिखाकर और बिलों में वास्तविक कीमत से ज्यादा रकम दर्ज करके पैसा विदेश भेजना। दूसरा, APMC इकाइयों के नाम पर खोले गए म्यूल खातों से नकदी निकालना। तीसरा, रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भारत से बाहर भेजना।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, रामधानी न्यायिक हिरासत में
इस मामले में ED पहले भी पुणे, मुंबई और बेंगलुरु में कई जगहों पर छापेमारी कर चुकी है। एजेंसी ने Edsom Fintech Pvt. Ltd. के संस्थापक राम यू. रामधानी को गिरफ्तार भी किया था। ED के मुताबिक, रामधानी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है। ED इस नेटवर्क से जुड़े लोगों, कंपनियों, बैंक खातों और कथित तौर पर ठगी से हासिल रकम के लेन-देन की कड़ियों का पता लगाने में जुटी है।
