DGCA Char Dham Helicopter Rules 2026: उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए दुखद हेलीकॉप्टर हादसे के ठीक एक दिन बाद, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने चारधाम हेलीकॉप्टर चार्टर सेवाओं के लिए सुरक्षा नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। DGCA ने 2 नवंबर 2026 से चारधाम की सभी चार्टर उड़ानों के लिए दो पायलट (Two-Pilot Configuration) का होना अनिवार्य कर दिया है।
चमोली हादसे के बाद DGCA की कड़ाई: चारधाम हेलीकॉप्टर उड़ानों में 2 पायलट अनिवार्य, ऑपरेटरों ने दी 2 नवंबर से सेवाएं ठप करने की चेतावनी
हालांकि, नियामक के इस कड़े रुख के बाद हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए सोमवार (2 नवंबर) से अपनी सेवाएं पूरी तरह से निलंबित करने की चेतावनी दी है।
DGCA के नए नियम और गाइडलाइंस
HT की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के साथ हुई आपातकालीन बैठक के बाद जारी लिखित निर्देशों के अनुसार:
दो पहाड़ी-प्रशिक्षित पायलट अनिवार्य: चारधाम की सभी चार्टर उड़ानों के लिए दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य होगी, जिसमें सह-पायलट (Co-pilot) को भी पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने का अनुभव होना चाहिए।
सकारात्मक क्लीयरेंस और PIREP रिपोर्ट: हर उड़ान से पहले पायलटों को सहस्रधारा कंट्रोल रूम से गंतव्य और मार्ग की स्पष्ट क्लीयरेंस (Enroute Clearance) लेनी होगी। साथ ही, प्रत्येक हेलीपैड पर लैंडिंग के बाद 'पायलट रिपोर्ट' (PIREP) कंट्रोल रूम में जमा करनी होगी।
UCADA की जिम्मेदारी: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के संचालन प्रमुख को इन क्लीयरेंस और पायलट रिपोर्टों का रिकॉर्ड बनाए रखने की रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
ऑपरेटरों का विरोध: 'कमर्शियल रूप से सेवाएं चलाना संभव नहीं'
DGCA के इस निर्देश के बाद, हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा और UCADA सचिव विनय शंकर पांडे को 31 अक्टूबर को एक संयुक्त पत्र लिखकर 2 नवंबर से सेवाएं निलंबित करने का प्रस्ताव रखा है।
लागत में भारी बढ़ोतरी: ऑपरेटरों का कहना है कि हर उड़ान में दो पायलटों की तैनाती से परिचालन लागत, क्रू की उपलब्धता, रहने और लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी बढ़ जाएगा।
वित्तीय अव्यवहार्यता: प्रचलित चार्टर दरों और सीमित प्रॉफिट मार्जिन के बीच इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को ऑपरेटर खुद वहन नहीं कर सकते और न ही इसे ग्राहकों पर पूरी तरह डाला जा सकता है।
सलाह-मशविरे का अभाव: ऑपरेटरों ने कहा कि सुरक्षा मानकों का सम्मान करते हुए भी, बिना किसी पूर्व चर्चा के यह फैसला थोपे जाने से सेवाएं चलाना आर्थिक रूप से असंभव हो जाएगा। उन्होंने सरकार से वैकल्पिक समाधान तलाशने के लिए तत्काल बैठक बुलाने का अनुरोध किया है।
