Delhi Police Families Press Conference: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा का शिकार हुए दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और जवानों के परिवारों ने शुक्रवार को एक भावुक प्रेसवार्ता आयोजित की। पुलिसकर्मियों के परिजनों ने हिंसा की आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात जवानों पर प्रदर्शनकारियों की आड़ में छिपे असामाजिक तत्वों ने पत्थरों, गमलों और जूतों से जानलेवा हमला किया। पीड़ित परिवारों ने संसद और सरकार से घायल पुलिसकर्मियों के अधिकारों की रक्षा करने और हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
'पिता की वर्दी खून से लथपथ थी...', CJP प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजनों की प्रेसवार्ता, संसद से उठाई न्याय की मांग
'सिर में आए थे 4 टांके'
प्रेसवार्ता के दौरान एक घायल सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के बेटे ने अपने पिता के इलाज और घटना के बाद की स्थिति को बयां किया।
खून से लथपथ वर्दी: ACP के बेटे ने बताया कि जब उनके पिता अस्पताल से लौटे तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी और इलाज के लिए उनके सिर के बाल काटकर 4 टांके लगाए गए थे।
असामाजिक तत्वों का हमला: अधिकारी ने अपने परिवार को बताया कि भीड़ में असामाजिक तत्व घुल-मिल गए थे, जिन्होंने अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिससे पुलिस बल को संभलने का मौका नहीं मिला।
सब-इंस्पेक्टर के बेटे का दर्द: एक घायल सब-इंस्पेक्टर के बेटे कुंजल ने बताया कि उनके पिता लगातार कहते थे कि जंतर-मंतर पर अब छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है। फ्रंट-लाइन बैरिकेड्स पर तैनात उनके पिता भी पथराव में घायल हुए थे।
'केवल एक पक्ष की कहानी दिखाई जा रही है'
प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक सहायक उप-निरीक्षक (ASI) की पत्नी सीमा ने कहा कि उनके पति 20 जुलाई को ड्यूटी पर गए थे और शाम को उन्हें एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल में भर्ती कराए जाने की खबर मिली। सीमा ने बताया कि उनके पति का सुरक्षा हेलमेट पथराव में पूरी तरह टूट गया था, यदि पत्थर सीधा लगता तो उनकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि संसद में केवल प्रदर्शनकारियों का ही पक्ष न उठाया जाए, बल्कि देश और लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करते हुए घायल हुए पुलिसकर्मियों के त्याग और अधिकारों पर भी चर्चा की जाए। परिजनों ने बताया कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जहां अदालत ने आश्वासन दिया है कि पुलिसकर्मियों के संवैधानिक और मानवाधिकारों की भी पूरी सुरक्षा की जाएगी।
