CJP-D : अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को पहली बगावत का सामना करना पड़ा है। इससे जुड़े मनीष ब्रह्मभट्ट ने दिपके से अलग होकर कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक (CJP-D) नाम से अपना नया प्लेटफॉर्म बनाया है। ब्रह्मभट्ट ने सीजेपी के संस्थापक दिपके पर प्रदर्शनकारियों को दरकिनार करने और युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन को 'टीम केजरीवाल' में बदलने का आरोप लगाया है। मनीष का आरोप है कि सीजेपी के नेतृत्व में दबदबा उन लोगों का है, जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए काम कर चुके हैं और इनकी दिलचस्पी केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध करने में है।
सीजेपी-डी के संस्थापक मनीष ब्रह्मभट्ट।
ब्रह्मभट्ट के आरोपों पर सीजेपी अथवा दिपके की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दिपके के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था
रिपोर्टों के मुताबिक अगस्त की शुरुआत में मनीष ब्रह्मभट्ट को जब पता चला कि CJP की कोर टीम दिपके के आवास पर बैठक कर रही है, तो वह गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे। ब्रह्मभट्ट और उनके सहयोगी राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि जंतर-मंतर के प्रदर्शनों में सक्रिय रहे स्वयंसेवकों को इन चर्चाओं से बाहर रखा गया है। प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद खबरों में ब्रह्मभट्ट की पहचान एक 'CJP कार्यकर्ता' के रूप में की गई।
आंदोलन के सफल होने के बाद इसे बेच दिया-ब्रह्मभट्ट
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक CJP-डेमोक्रेटिक के संस्थापक मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को दिल्ली में कहा, 'आज हम ‘कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक’ की शुरुआत कर रहे हैं। हमें ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी? यह आंदोलन देश का था और इसकी सफलता इसलिए हुई क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया। लेकिन आंदोलन के सफल होने के बाद इसे बेच दिया गया और इसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अब यह ‘टीम केजरीवाल’ बन गया है, क्योंकि अभिजीत दिपके और अन्य लोगों ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यीय टीम बना ली।
'महिला मित्र, कॉलेज के दोस्तों को टीम में शामिल किया'
उन्होंने कहा, 'आंदोलन की सफलता के बाद एक भी स्वयंसेवक या प्रदर्शनकारी को न तो बुलाया गया और न ही उनकी राय ली गई। सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम के जरिए जुड़े लोगों से भी टीम में शामिल किए जाने के जरूरी मानदंडों को लेकर कोई राय नहीं मांगी गई। इसके बजाय, आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों के साथ एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना दी गई। हम चाहते थे कि यह एक राष्ट्रीय टीम हो जिसमें हर राज्य से पांच लोगों को शामिल किया जाए और उन राज्यों के प्रदर्शनकारियों तथा स्वयंसेवकों को प्राथमिकता दी जाए। हमने यह भी इच्छा जताई थी कि चयन प्रक्रिया किसी ‘हाईकमान’ या मनमाने तरीके से निर्णय लेने वाले व्यक्ति के निर्देश पर नहीं होनी चाहिए। लेकिन हमारी इस मांग को खारिज कर दिया गया और मनमाने तरीके से टीम का गठन कर दिया गया। इस टीम को बनाने का विचार भी अरविंद केजरीवाल से ही आया था, क्योंकि वह शुरुआत से ही धोखा देते रहे हैं। जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ था, तब उन्होंने अन्ना का इस्तेमाल किया।'
दिपके ने बीते मई में बनाई CJP
बता दें कि दिपके ने 16 मई को CJP की स्थापना एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में की थी। यह कदम मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के कुछ लोगों को कथित तौर पर 'कॉकरोच' और 'परजीवी' कहे जाने वाली टिप्पणियों के बाद उपजे आक्रोश के बीच उठाया गया था। शुरुआत में यह एक ऑनलाइन मजाक था, लेकिन बाद में यह एक युवा मंच के रूप में विकसित हो गया, जिसने बेरोजगारी, परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे उठाए।
