CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन भी दिल्ली में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी रही। सुप्रीम कोर्ट के उस स्पष्ट आदेश के बावजूद कि अवैध हिरासतें नहीं की जानी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अनुमति दी जानी चाहिए, पुलिस ने सड़कों पर उतरे कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठ रहे सवाल
सड़क पर महिला प्रदर्शनकारी को घसीटने का वीडियो आया सामने
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के तौर-तरीकों पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब सोशल मीडिया पर एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया। इस वीडियो में एक पुरुष पुलिसकर्मी हिरासत में लेने की प्रक्रिया के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को सड़क पर घसीटता हुआ नजर आ रहा है। इन दृश्यों के सामने आने के बाद महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के बर्ताव की जमकर आलोचना हो रही है।
पत्रकारों को भी हिरासत में लेने का आरोप
CJP के प्रदर्शन के दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठे। जमीनी स्तर पर प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कई स्वतंत्र और वरिष्ठ पत्रकारों ने पुलिस की ओर से मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने और उन्हें हिरासत में लिए जाने की शिकायत की है।
वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बावजूद-जिसमें मीडियाकर्मियों को ग्राउंड पर अपना काम करने की अनुमति दी गई है- पुलिस ने कम से कम सात पत्रकारों को हिरासत में ले लिया और उन्हें जबरन पुलिस वैन में ठूंस दिया। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद पत्रकारों को अपना काम करने से रोका गया।
पुलिस की कार्रवाई और प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारी को घसीटने का वीडियो और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के आरोपों ने पुलिस की कार्रवाई को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने के अधिकार का सवाल है, तो दूसरी ओर पत्रकारों के स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने की अनुमति को लेकर चिंता जताई जा रही है।
