कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं और सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पार्टी के विरोध प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बावजूद हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया, बल्कि महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलते हुए शांति और अहिंसा को चुना।
त्योहार मनाएं लेकिन सौरव और आशुतोष को न भूलें
अपने समर्थकों के नाम भावुक संदेश में दिपके ने कहा कि त्योहारों के दौरान वे अपने परिवार और प्रियजनों के साथ समय बिताएं, लेकिन सौरव और आशुतोष को भी याद रखें। दोनों 13 अक्टूबर से जेल में हैं और अपने परिवारों के साथ त्योहार नहीं मना पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल होने का फैसला उनका अपना था, लेकिन इसके परिणाम उनके परिवारों को भी भुगतने पड़ रहे हैं।
दिपके ने विदेशों में हुई हिंसक घटनाओं से आंदोलन की तुलना करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बाद भी हिंसा नहीं की। उन्होंने कहा कि भारत में सौरव दास और आशुतोष खुशी-खुशी जेल गए। उन्होंने वह नहीं किया, जो फ्रांस में हो रहा है।
उन्होंने दोनों नेताओं के संघर्ष की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से करते हुए कहा कि गांधी की तरह वे भी जेल में रहकर अहिंसा के रास्ते पर कायम हैं। दिपके ने भरोसा जताया कि दोनों नेता जेल से उसी मुस्कान के साथ बाहर आएंगे और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
‘नफरत के खिलाफ लड़ते हुए खुद नफरत का हिस्सा न बनें’
CJP संस्थापक ने समर्थकों को आगाह किया कि दोनों नेताओं के साथ हुए व्यवहार से उनमें नफरत पैदा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन ऐसे लोगों के खिलाफ है जिनके मन में नफरत है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को खुद वैसा नहीं बनना है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।
दिपके ने अपने संदेश में कहा कि बीते कई दिन आंदोलन के समर्थकों के लिए मुश्किल भरे रहे हैं। कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्होंने पुलिस की ओर से कथित मारपीट का सामना भी किया। उन्होंने बताया कि सौरव और आशुतोष के परिवारों से बात करने पर उन्हें हिम्मत मिली। दिपके ने कहा कि सौरव की मां ने उनसे कहा कि उनका बेटा जुझारू है और दूसरे लोगों को भी अपना ध्यान रखने के लिए कहें। वहीं, जेल में बंद होने के कारण आशुतोष अपने परिवार के एक सदस्य के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। दिपके ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद दोनों नेताओं के परिवारों ने उन्हें चिंता न करने के लिए कहा।
13 अक्टूबर को गिरफ्तार हुए थे दोनों नेता
CJP और उसके समर्थक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। 13 अक्टूबर को CJP कार्यकर्ताओं के जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया गया था। इससे एक दिन पहले जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। दोनों को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसे 19 अक्टूबर को दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया।
दिपके ने कहा कि दोनों नेताओं की गिरफ्तारी से आंदोलन कमजोर नहीं होगा। उन्होंने सौरव और आशुतोष को अपना भाई बताते हुए कहा कि आंदोलन गांधी और बीआर आंबेडकर के मूल्यों, प्रेम, करुणा और अहिंसा के आधार पर जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “अगर सौरव और आशुतोष जेल जाते हैं, तो ऐसा नहीं है कि हम डर जाएंगे। हम पीछे नहीं हटेंगे।”
