Chirag Paswan vs Jitan Ram Manjhi: केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी दल-चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में 'सब-कोटा' और 'क्रीमी लेयर' लागू करने को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। शनिवार को चिराग पासवान द्वारा जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन से इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद, रविवार को मोतिहारी में आयोजित 'गरीब चौपाल' से मांझी ने चिराग पर तीखा हमला बोला।
आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए के दो केंद्रीय मंत्री आमने-सामने
मोतिहारी के बापू सभागार में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खुले मंच से कहा कि वे गरीबों और वंचिकों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। चिराग पासवान का नाम लिए बिना उन्होंने तंज कसा, "जो लोग सोने की चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए हैं, उन्हें आरक्षण में संशोधन से तो तकलीफ होगी ही।" मांझी ने जोर देकर कहा कि वे अपनी बात पर कायम हैं और SC आरक्षण का फायदा सबसे पिछड़े दलित समुदायों तक पहुंचाने के लिए इसमें संशोधन होना ही चाहिए।
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आरक्षण का बड़ा हिस्सा कुछ सक्षम दलित जातियों तक सीमित-मांझी
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब मांझी की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया, जिसमें राज्यों को SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई है। मांझी का तर्क है कि आरक्षण का बड़ा हिस्सा केवल कुछ सक्षम दलित जातियों तक सीमित रह गया है, जबकि मुसहर जैसे बेहद पिछड़े समुदायों को इसका वाजिब हक नहीं मिल पा रहा। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि अगर मांझी और उनके मंत्री बेटे संतोष सुमन 'क्रीमी लेयर' की वकालत करते हैं, तो उन्हें सबसे पहले खुद आरक्षण का लाभ छोड़कर अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
SC आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक भेदभाव-चिराग
चिराग का तर्क है कि SC आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक भेदभाव है। यदि आरक्षण में क्रीमी लेयर या सब-कोटा लाया गया तो इससे दलित समाज आपस में बंट जाएगा और सामाजिक न्याय की मूल भावना ही कमजोर हो जाएगी। दोनों ही दल केंद्र व बिहार सरकार में साझीदार हैं, ऐसे में इस सीधे टकराव ने राज्य के सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है।
