Alliance Between BJP-Shivsena UBT : महाराष्ट्र की राजनीति में खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उद्धव गुट वाली शिवसेना के बीच कुछ 'खिंचड़ी' पक रही है। इसका संकेत शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने दिया है। राउत का कहना है कि भाजपा में ऐसे बहुत सारे नेता हैं जो दोनों दलों को एक साथ देखना चाहते हैं लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। शिवसेना सांसद ने यह भी कहा कि उनकी भी पार्टी में ऐसे नेता हैं जो भाजपा नेताओं की ही तरह विचार रखते हैं। राउत का यह बयान बहुत बड़ा है। यदि भाजपा और उद्धव गुट वाली शिवसेना के बीच गठबंधन हो जाता है तो यह राष्ट्रीय राजनीति की बहुत बड़ी घटना और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।
महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हुई।
उद्धव-चंद्रकांत पाटील के बीच हुई है मुलाकात
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक राउत का यह बयान एक शादी समारोह में चंद्रकांत पाटील और उद्धव ठाकरे के बीच हुई मुलाकात के बाद आया है। उद्धव से मुलाकात के बाद भाजपा नेता ने कहा कि दोनों दलों के बीच यदि गठबंधन होता है तो उनके लिए यह 'सुनहरा अवसर' होगा। पाटील के इस बयान का हवाला देते हुए राउत ने कहा, 'चंद्रकांत पाटील शुरुआत से ही भाजपा-शिवसेना गठबंधन के समर्थक रहे हैं। इस गठबंधन में चंद्रकांत दादा जैसे अन्य नेताओं की एक पुरानी पीढ़ी थी। भाजपा में अब बहुत सारे लोग नए हैं। वे 25 वर्ष पुराने इस गठबंधन के महत्व को नहीं समझते हैं। लेकिन चंद्रकांत पाटील की भावनाओं की तरह हमारी भी पार्टी में ऐसे कई नेता हैं जो उनकी तरह राय रखते हैं। ऐसे इसलिए है क्योंकि हमने 25 सालों तक भाजपा के साथ मिलकर काम किया है।'
टूट के लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता जिम्मेदार-राउत
रिपोर्ट के मुताबिक राउत ने आगे कहा कि जब शिवसेना एक थी तो उसने नरेंद्र मोदी के साथ भी ठीक तरीके से काम किया लेकिन इस टूट के लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता जिम्मेदार हैं। शिवसेना के बारे में अपने विचार रखने के लिए राउत ने भाजपा नेता को धन्वयाद दिया। राउत ने दावा किया कि भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना का गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चलेगा। शिंदे गुट की शिवसेना वैसे ही टूट जाएगी जैसा कि हमारे साथ हुआ।
दोनों दलों के बीच नैसर्गिक गठबंधन-दानवे
दरअसल, शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के बीच भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भास्कर जाधव और विनायक राउत जैसे बड़े नेताओं ने ऑफ द रिकॉर्ड कहा है कि इस बारे में उद्धव ठाकरे जो फैसला लेंगे, हम उसके साथ रहेंगे। धाराशिव से सेना यूबीटी के विधायक कैलाश पाटील ने कहा कि हमारी पार्टी के मुखिया जो भी फैसला लेंगे, हम सभी उनके साथ होंगे। विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह सही है कि भाजपा और सेना (यूबीटी) में ऐसे कई नेता हैं जिनका मानना है कि दोनों पार्टियों को एक साथ आ जाना चाहिए क्योंकि दोनों के बीच नैसर्गिक गठबंधन है।
सही समय पर इसका जवाब दूंगा-राउत
इस सवाल पर कि क्या वह भी सोचते हैं कि सेना (यूबीटी) और भाजपा को एक साथ आ जाना चाहिए। इस पर राउत ने कहा कि अभी वह रुकेंगे और इंतजार करें। उन्होंने कहा, 'मैं सही समय पर इसका जवाब दूंगा...हम देखेंगे कि आगे क्या हो रहा है।' बता दें कि संयुक्त शिवसेना और भाजपा ने 2019 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था लेकिन सीएम पद को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के साथ चली गई और एमवीए नाम से सरकार बनाई। इस सरकार के सीएम उद्धव ठाकरे बने। इसके बाद 2022 में शिवसेना टूट गई। एकनाथ शिंदे ने बगावत करते हुए अपनी अलग शिवसेना बना ली।
