Amit Shah Vs Akhilesh Yadav : वक्फ संशोधन विधेयक पर जारी चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा खुद को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताती है लेकिन वह अपना अध्यक्ष नहीं चुन पा रही है। अखिलेश के इस बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया। चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा अपना अध्यक्ष एक लंबी प्रक्रिया से चुनती है। भाजपा के पास 12 से 13 करोड़ सदस्य हैं। इनमें से किसी एक का चुनाव करने में वक्त लगता है। गृह मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि हमारा अध्यक्ष एक परिवार से नहीं आता या चार-पांच लोगों में से नहीं चुना जाता। शाह ने कहा कि अखिलेश यादव 25 साल तक सपा का अध्यक्ष बने रहेंगे।
लोकसभा में बुधवार को पेश हुआ वक्फ संशोधन विधेयक।
नाकामी छिपाने के लिए भाजपा यह बिल लाई-अखिलेश
वक्फ संशोधन विधेयक पर अखिलेश ने कहा कि इस बिल में कई खामियां हैं और अपनी नाकामियां छिपाने के लिए सरकार इसे लेकर आई है क्योंकि यह सरकार हर मोर्चे विफल हुई है। यह मुसलमानों से उनका घर-दुकान छीनने की साजिश है। भाजपा अलोकतांत्रिक पार्टी है जो असहमति को अपनी जीत बताती है। सपा नेता ने कहा कि इस बिल के जरिए भाजपा मुसलमानों को उकसाने की कोशिश कर रही है। वह चाहती है कि मुस्लिम उग्र हों।ये मुस्लिमों में भी बंटवारा चाहती है। सपा नेता ने पूछा कि क्या सरकार ने रेलवे और सेना की जमीन नहीं बेची है। आगे क्या वह वक्फ की जमीन किसी और को नहीं देगी?
वक्फ धार्मिक संस्था नहीं-रविशंकर प्रसाद
इससे पहले भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वक्फ कोई धार्मिक संस्था नहीं बल्कि एक वैधानिक संस्था है। विपक्ष आजकल लाल किताब लेकर घूमता है। भाजपा सांसद ने पूछा कि वक्फ की संपत्तियों पर आज तक कितने स्कूल, अस्पताल खुले। गरीब मुसलमान महिलाओं के लिए कितने सिलाई, बुनाई के संस्थान खुले और कितनी गरीब मुस्लिम महिलाओं की इन्होंने शादी कराई। शाहबानो मामले में कांग्रेस ने तुष्टिकरण की। उस समय देश के पीएम राजीव गांधी थे। उनके पास 400 सांसदों का प्रचंड बहुमत था लेकिन याद करिए उसके बाद कांग्रेस को कभी बहुमत नहीं मिला।
हम इस विधेयक का विरोध करेंगे-AIMPLB
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने वक्फ संशोधन विधेयक पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह वक्फ संपत्तियों के लिए लाभकारी होने के बजाय नुकसानदेह होगा। एआईएमपीएलबी के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, ‘एआईएमपीएलबी और अन्य मुस्लिम संगठनों ने विधेयक पर अपनी चिंताओं से संयुक्त संसदीय समिति को अवगत कराया था, लेकिन इस पर विचार नहीं किया गया। इसके बाद, दिल्ली और पटना समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए गए जहां प्रदर्शनकारियों ने असहमति दर्ज कराने के लिए सांकेतिक रूप से काली पट्टी बांधी।’
