लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्मजयंती के मौके पर उनके गांव सिताब दियारा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि उनका सबसे बड़ा योगदान तो ये है कि 70 के दशक में उन्होंने भ्रष्टाचार और सत्ता के नशे में डूबी सरकार के खिलाफ जनअभियान चलाया था। 1973 में इंदिरा जी की अगुवाई में गुजरात में चिमनभाई पटेल सीएम थे। इंदिरा जी ने सीधे पैसा वसूली के काम पर लगा दिया और वहां से भ्रष्टाचार का आगाज हुआ। गुजरात में छात्र इसके खिलाफ उठ खड़े हुए जेपी की अगुवाई में आंदोलन चला और चिमनभाई की सरकार चली गई।
अमित शाह, गृहमंत्री
जेपी को इस वजह से डाला गया जेल में
गुजरात के आंदोलन के बाद उन्होंने बिहार की धरती पर आंदोलन चलाना शुरू किया। आंदोलन को देख इंदिरा गांधी परेशान हो गईं और उसका असर यह हुआ कि देश की प्रधानमंत्री को आपातकाल लगाना पड़ा और जय प्रकाश नारायण को जेल में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि यह तो कांग्रेस की परंपरा रही है जिस किसी ने उसकी काली करतूतों को जनता के सामने रखा उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जेपी की ललकार से कांग्रेस पूरी तरह डरी हुई थी। लेकिन लोगों को उम्मीद नजर आ रही थी कि अब कुछ बड़ा बदलाव आने वाला है।
In 1973, under Indira ji's leadership, Gujarat had a Congress govt with Chiman Patel as CM. Indira ji publicly gave… t.co/WCYTn7ykjX
— ANI (@ANI) Oct 11, 2022
नीतीश कुमार पर साधा निशाना
मैं आज बिहार की जनता से पूछना चाहता हूं कि जेपी आंदोलन से ऊंचाईयां हासिल करने वाले नेता आज सिर्फ सत्ता के लिए कांग्रेस की गोद में उनका नाम लेकर बैठे हैं-क्या आप उनके साथ हैं? क्या यही है जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों की राजनीति? यह उनके (#जयप्रकाश नारायण) द्वारा दिखाया गया मार्ग नहीं है। उन्होंने सत्ता के लिए कभी कुछ नहीं किया और जीवन भर सिद्धांतों के लिए काम किया। आज सत्ता के लिए 5 बार बिहार के सीएम पाला बदल चुके हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ शाह वाराणसी होते हुए सिताब दियारा पहुंचें। शाह सिताब दियारा में जेपी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगे और एक जनसभा को संबोधित किया। गृह मंत्री के दौरे के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।बिहार में भाजपा के सत्ता से बेदखल होने के बाद शाह का यह दूसरा बिहार दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने 23 सितंबर को सीमांचल क्षेत्र के पूर्णिया और किशनगंज का दौरा किया था।
