चीन को पटखनी देने के लिए बड़ी तैयारी, आज बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर सकता है भारत

  • Authored by: किशोर जोशी
  • Updated Dec 15, 2022, 09:35 AM IST

India-China Standoff: भारत और चीन के बीच सीमा पर चल रहे तनाव के बीच आज से अरुणाचल प्रदेश में भारतीय वायुसेना दो दिवसीय अभ्यास कर रही है। वहीं भारत अपने रक्षा कवच को मजबूत करने की तैयारियों के तहत आज अग्नि फाइव मिसाइल का परीक्षण कर सकता है।

New Delhi: अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के तवांग सेक्टर (Tawang) में भारत और चीन (India-China) के सैनिकों के बीच झड़प के बाद दोनों देशों से सीमा पर तनाव बना हुआ है। इस बीच चीन को पटखनी देने के लिए भारत ने बड़ी तैयारी की है और इसी के तहत भारत आज बैलेस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) का परीक्षण कर सकता है। वायुसेना ने 2 दिन का नोटिस टू एयरमैन जारी किया है और भारत अग्नि फाइव (Agni-V) मिसाइल परीक्षण कर सकता है। 5400 किलोमीटर की रेंज में मिसाइल परीक्षण किया जाएगा। बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण चीन के स्पाइस शिप (Spice Ship) के इंडियन ओशन रीजन में दाखिल होने से टाला गया था।

Indian Missile

प्रतीकात्मक फोटो

आज से शुरू हो रहा है युद्धाभ्यास

भारतीय वायुसेना समुद्र के अलावा आकाश में भारत की ताकत दिखाएगी। अरुणाचल सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी इंडियन एयर फोर्स की एक्सरसाइज आज से शुरू हो रही है। इस युद्धाभ्यास में अग्रिम पंक्ति के करीब सभी युद्धक विमान और इस क्षेत्र में तैनात अन्य संसाधन शामिल किये जाएंगे। सूत्रों ने कहा कि अभ्यास का मकसद भारतीय वायुसेना की समग्र युद्धक क्षमता और इस क्षेत्र में सैन्य तैयारियों को परखना है। हालांकि, भारत और चीन की सेनाओं के बीच ताजा गतिरोध के बहुत पहले इस अभ्यास की योजना बनाई गई थी और इसका इस घटना से कोई संबंध नहीं है।

भारत ने उतारे थे युद्धक विमान

भारतीय वायुसेना ने पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में एलएसी पर भारतीय हिस्से में चीन की बढ़ती हवाई गतिविधियों के बाद अपने लड़ाकू विमानों को उड़ाया था। पीटीआई की खबर के मुताबिक, क्षेत्र में चीन द्वारा ड्रोन सहित कुछ हवाई प्लेटफार्म की तैनाती तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति को एकतरफा बदलने के लिए नौ दिसंबर को किये गये चीनी सेना के प्रयासों से पहले हुई थी। चीनी ड्रोन एलएसी के काफी पास आ गये थे जिसके कारण भारतीय वायुसेना को अपने युद्धक विमान उतारने पड़े थे और समग्र युद्धक क्षमता को बढ़ाना पड़ा था।

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