Army Chief Upendra Dwivedi: थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कुछ ऐसा कह दिया है, जिससे पाकिस्तान में हलचल मचनी तय है, अभी तक पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर की मार से उभरा भी नहीं है और अब ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की बात होने लगी है। जनरल द्विवेदी ने एक बार फिर आज स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी भी जारी है और वर्तमान में इसपर केवल अस्थायी रोक लगी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ती है, तो भारतीय सेना के तीनों अंग 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' (operation sindoor 2.0)के लिए पूरी तरह मुस्तैद और तैयार हैं। थल सेनाध्यक्ष पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (फोटो- PTI)
आधुनिक युद्धक्षेत्र और 24x7 निगरानी
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में रणभूमि बेहद स्पष्ट है। उपग्रहों और आधुनिक तकनीकों के कारण चौबीसों घंटे हर एक गतिविधि पर दोनों पक्षों की नजर रहती है। उन्होंने कहा, "चूंकि युद्धक्षेत्र में हर हलचल की जानकारी दूसरी तरफ को होती है, इसलिए हमें सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने सैनिकों के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी तैनाती, उपयोग और सुरक्षात्मक उपायों को लेकर बेहद सतर्क रहना होगा। वर्तमान में हमारा पूरा ध्यान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और खुद को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार करने पर है।"
इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर में राष्ट्रीय एकता जरूरी
सूचना युद्ध (Information Warfare) के महत्व पर बात करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि इसमें सफलता केवल जनविश्वास और राष्ट्रीय एकता के बल पर ही हासिल की जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा, "सूचना युद्ध तभी सफल होता है जब पूरा देश एक साथ आता है और जानकारी देने वाले तंत्र पर भरोसा करता है। यदि ऐसा होता है, तो मैं आश्वस्त कर सकता हूँ कि जो देश आपस में और सभी हितधारकों (Stakeholders) पर भरोसा करता है, वह युद्ध हमेशा जीतेगा।"
एनडीए के दिनों को किया याद
परेड के दौरान अपने पुराने दिनों को याद करते हुए जनरल द्विवेदी भावुक भी हुए। उन्होंने बताया कि एनडीए पहुंचने पर सबसे पहले वह अपने 'चार्ली स्क्वाड्रन' गए, जो इस बार 'चैंपियन स्क्वाड्रन' बना है। अपने कैडेट जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैं खुद पीटी कैप्टन था। कल जब पीटी डिस्प्ले हो रहा था, तो मेरा भी मन उनके साथ एक्सरसाइज करने का कर गया, और अगर उम्र की सीमाएं आड़े न आतीं, तो शायद मैं ऐसा कर भी देता।" उन्होंने वर्तमान पीढ़ी के कैडेट्स के आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी देश की सशस्त्र सेनाओं को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
