World Spine Day 2026: सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न, ऑफिस में कुछ घंटे बैठने के बाद कमर दर्द और रात को सोते समय पीठ में खिंचाव। ये परेशानियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। युवा और कामकाजी लोग भी इनका सामना कर रहे हैं। खास बात यह है कि कई बार हम दर्द को मामूली थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द के पीछे गलत तरीके से बैठना, शारीरिक गतिविधियों की कमी या रीढ़ से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।
हर साल 16 अक्टूबर को वर्ल्ड स्पाइन डे (World Spine Day) मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को रीढ़ की सेहत, पीठ दर्द से बचाव और नियमित शारीरिक गतिविधियों के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
आज हमारी दिनचर्या में मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऑफिस में आठ से नौ घंटे बैठना, घर लौटकर सोफे पर मोबाइल चलाना और फिर देर रात तक स्क्रीन देखते रहना आम हो गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारी रोजमर्रा की आदतें रीढ़ की सेहत पर असर डाल रही हैं?
रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर के लिए क्यों जरूरी है
रीढ़ केवल शरीर को सीधा रखने वाली हड्डियों की संरचना नहीं है। यह शरीर को सहारा देती है, झुकने और मुड़ने में मदद करती है और स्पाइनल कॉर्ड यानी मेरुरज्जु की सुरक्षा करती है। रीढ़ में मौजूद डिस्क झटकों को सहने में मदद करती हैं, जबकि आसपास की मांसपेशियां शरीर को स्थिर रखने का काम करती हैं।
जब हम लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते, तो पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में अकड़न और असहजता बढ़ सकती है। हालांकि हर कमर दर्द का कारण गलत पोस्चर नहीं होता। उम्र, चोट, डिस्क से जुड़ी समस्याएं और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
World Spine Day पर जानें रीढ़ को स्वस्थ रखने के 7 तरीके
1. लगातार बैठे रहने की आदत बदलें
ऑफिस में काम करते समय अक्सर पता ही नहीं चलता कि तीन से चार घंटे कब गुजर गए। लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठने से पीठ में अकड़न बढ़ सकती है। इसलिए हर 30 से 60 मिनट में अपनी स्थिति बदलें। कुछ देर खड़े हों, पानी लेने जाएं या थोड़ी चहलकदमी करें। जरूरी नहीं कि हर बार लंबा ब्रेक लिया जाए। छोटी-छोटी गतिविधियां भी मददगार हो सकती हैं।
2. लैपटॉप और मोबाइल इस्तेमाल करने का तरीका सुधारें
मोबाइल देखते समय गर्दन लगातार नीचे झुकाए रखना असहजता बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि स्क्रीन आंखों के करीब ऊंचाई पर हो। लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करते हैं तो अलग कीबोर्ड और माउस के साथ स्क्रीन को सही ऊंचाई पर रखना उपयोगी हो सकता है। कुर्सी पर बैठते समय पैरों को जमीन पर टिकाएं और पीठ को पर्याप्त सहारा दें।
3. रोजाना पैदल चलने की आदत डालें
रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए केवल आराम करना पर्याप्त नहीं है। नियमित गतिविधियां भी जरूरी हैं। पैदल चलना एक आसान शुरुआत हो सकती है। अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना वॉक करें। इससे शरीर सक्रिय रहता है और पीठ की अकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। अगर पहले से गंभीर दर्द है तो गतिविधि शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।
4. पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं
रीढ़ को सहारा देने में पेट, कमर और कूल्हों की मांसपेशियों की अहम भूमिका होती है। इन्हें सामूहिक रूप से कोर मसल्स कहा जाता है। प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह से ब्रिज, बर्ड-डॉग और दूसरे हल्के स्ट्रेंथ एक्सरसाइज किए जा सकते हैं। सही तकनीक जरूरी है। गलत तरीके से व्यायाम करने पर परेशानी बढ़ सकती है।
5. भारी सामान उठाते समय सावधानी रखें
घर में पानी की बाल्टी उठाना हो, भारी सूटकेस रखना हो या फर्श से कोई सामान उठाना हो, शरीर की स्थिति पर ध्यान दें। सामान को शरीर के करीब रखें और जरूरत के अनुसार घुटनों व कूल्हों को मोड़ें। भारी वजन उठाते हुए अचानक कमर घुमाने से बचें। अगर सामान बहुत भारी है तो मदद लें।
6. सोने की स्थिति और गद्दे पर ध्यान दें
सुबह उठने पर बार-बार पीठ में दर्द होता है तो अपनी सोने की स्थिति और गद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह का गद्दा सही नहीं होता। ऐसा गद्दा चुनें जो आरामदायक हो और शरीर को पर्याप्त सहारा दे। करवट लेकर सोते समय घुटनों के बीच तकिया रखना कुछ लोगों के लिए आरामदायक हो सकता है।
7. कमर दर्द को हमेशा मामूली समझकर नजरअंदाज न करें
कभी-कभार होने वाला हल्का कमर दर्द सामान्य मांसपेशीय खिंचाव से जुड़ा हो सकता है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या पैर तक फैलने लगे तो जांच जरूरी है। खासकर पैरों में कमजोरी, सुन्नपन या पेशाब-पाखाने पर नियंत्रण में बदलाव जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
क्या गलत पोस्चर से स्लिप डिस्क हो सकती है
यह सवाल बहुत से लोगों के मन में रहता है। गलत तरीके से बैठने या लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से मांसपेशियों में दर्द और तनाव बढ़ सकता है। लेकिन केवल खराब पोस्चर को स्लिप डिस्क का सीधा कारण मानना सही नहीं है। डिस्क की समस्या में उम्र के साथ होने वाले बदलाव, चोट और अन्य कारकों की भी भूमिका हो सकती है।
इसलिए सिर्फ एकदम सीधा बैठने पर ध्यान देने के बजाय नियमित रूप से स्थिति बदलना, सक्रिय रहना और मांसपेशियों को मजबूत बनाना अधिक उपयोगी है।
रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए आज से क्या बदलें
वर्ल्ड स्पाइन डे का संदेश केवल एक दिन व्यायाम करने तक सीमित नहीं है। रीढ़ की देखभाल रोजमर्रा की छोटी आदतों से शुरू होती है। ऑफिस में बैठने के बीच ब्रेक लेना, लिफ्ट के बजाय कभी-कभी सीढ़ियां इस्तेमाल करना, नियमित वॉक करना और शरीर की क्षमता के अनुसार व्यायाम करना लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है।
याद रखें, रीढ़ को स्वस्थ रखने का मतलब हर समय एक ही परफेक्ट पोस्चर में बैठना नहीं, बल्कि शरीर को नियमित रूप से सक्रिय रखना भी है।
