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World Menopause Day: मेनोपॉज में रात को पैरों में क्यों होने लगता है दर्द? जानें इसके कारण और राहत के उपाय

World Menopause Day: मेनोपॉज और पेरीमेनोपॉज के दौरान रात में पैरों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और नींद न आने की समस्या बढ़ सकती है। जानें इसके कारण, तनाव और जीवनशैली का असर तथा राहत पाने के 3 आसान उपाय।

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मेनोपॉज के लक्षण और राहत के उपाय (Photo - AI)

World Menopause Day: मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक पड़ाव है, लेकिन इस दौरान शरीर में होने वाले बदलाव कई बार रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगते हैं। किसी को अचानक गर्मी लगने और पसीना आने की परेशानी होती है, तो किसी की नींद बार-बार टूटने लगती है। वहीं, कुछ महिलाओं को रात में पैरों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या भारीपन महसूस होता है। यह परेशानी न केवल आराम में बाधा डालती है, बल्कि अगले दिन थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन भी बढ़ा सकती है। World Menopause Day के मौके पर समझें कि, मेनोपॉज के दौरान रात में पैरों में दर्द क्यों हो सकता है और इससे राहत पाने के लिए अपनी दिनचर्या में कौन-से बदलाव किए जा सकते हैं।

मेनोपॉज में रात को पैरों में दर्द क्यों होता है?

मेनोपॉज से पहले के चरण यानी पेरीमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बदलता है। इसका असर नींद, शरीर के तापमान, मूड और मांसपेशियों-जोड़ों से जुड़ी समस्याओं पर पड़ सकता है। कुछ महिलाओं को इस दौरान मांसपेशियों में दर्द, अकड़न या पैरों में असहजता महसूस होती है। हालांकि, हर महिला में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते और पैरों के दर्द की वजह केवल हार्मोनल बदलाव नहीं होते हैं।

दिनभर शारीरिक गतिविधि कम होना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, मांसपेशियों पर अधिक दबाव, तनाव और नींद की कमी भी दर्द को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, शरीर में आयरन की कमी, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, नसों से जुड़ी समस्याएं या रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम भी रात में पैरों में बेचैनी और दर्द का कारण बन सकते हैं।

तनाव और नींद की कमी से बढ़ सकती है समस्या

मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलावों के साथ तनाव और चिंता की समस्या भी सामने आ सकती है। यदि रात में बार-बार नींद टूटती है, तो शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इससे दर्द के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है और मांसपेशियों की थकान भी अधिक महसूस हो सकती है। हालांकि, खराब पाचन को पैरों के दर्द का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा। लेकिन संतुलित भोजन की कमी, पोषक तत्वों की कमी और अनियमित दिनचर्या समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल दर्द कम करने के बजाय उसकी संभावित वजह को समझना जरूरी है।

राहत पाने के 3 आसान उपाय

एक्सपर्ट्स खानपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतों पर जोर देते हैं। मेनोपॉज के दौरान भी नियमित गतिविधि, पर्याप्त पोषण और आराम को दिनचर्या का हिस्सा बनाना उपयोगी हो सकता है। नीचे दिए गए उपाय सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सुझाव हैं, इन्हें रुतुजा दिवेकर के प्रत्यक्ष कथन या उनके बताए हुए विशिष्ट उपाय न समझें।

1. सोने से पहले पैरों को हल्का स्ट्रेच करें

बिस्तर पर लेटकर पंजों को धीरे-धीरे अपनी ओर खींचें और फिर आगे की तरफ ढीला छोड़ें। इसे कुछ बार दोहराएं। पिंडलियों और जांघों की हल्की स्ट्रेचिंग मांसपेशियों के खिंचाव में राहत दे सकती है। किसी भी गतिविधि के दौरान दर्द बढ़े, तो उसे तुरंत रोक दें।

2. दिनभर बैठे रहने से बचें

अगर आपका ज्यादातर समय कुर्सी पर बैठकर गुजरता है, तो बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट टहलें। अपनी क्षमता के अनुसार नियमित वॉक और हल्की एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। इससे शारीरिक सक्रियता बनी रहती है और मांसपेशियों की जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।

3. खानपान और नींद की आदतों पर ध्यान दें

भोजन में दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। सोने-जागने का समय नियमित रखें और रात में कैफीन का सेवन कम करें। यदि बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन होती है, तो बिना जांच के आयरन, मैग्नीशियम या अन्य सप्लीमेंट लेना शुरू न करें।

कब डॉक्टर से करें संपर्क

अगर पैरों का दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार नींद तोड़ता है या उसके साथ सुन्नपन, कमजोरी अथवा चलने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। एक पैर में अचानक दर्द, सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं, क्योंकि ये खून का थक्का बनने के संकेत हो सकते हैं। सांस फूलने या सीने में दर्द के साथ ऐसी समस्या हो, तो आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

डिस्क्लेमर - यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मेनोपॉज के दौरान पैरों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं। यहां बताए गए उपाय डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं हैं। लगातार या गंभीर दर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लें और बिना एक्सपर्ट की सलाह से कोई सप्लीमेंट न लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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