World Iodine Deficiency Day: क्या आप जानते हैं कि शरीर में आयोडीन की कमी सिर्फ थायरॉइड की परेशानी ही नहीं बढ़ाती, बल्कि इसका असर आपकी एनर्जी, याददाश्त, वजन और यहां तक कि बालों पर भी दिखाई दे सकता है। आयोडीन एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसकी शरीर को बहुत कम मात्रा में जरूरत होती है। लेकिन इसकी कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस (World Iodine Deficiency Day) मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को आयोडीन की अहमियत और इसकी कमी से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक करना है।
आयोडीन की कमी कैसे पता लगती है (AI Image)
आयोडीन हमारे शरीर में थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी होता है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, तापमान, विकास और ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जब लंबे समय तक पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता, तो थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे हाइपोथायरॉइडिज्म और घेंघा जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता है। आइए जानते हैं आयोडीन की कमी के ऐसे 7 संभावित संकेत, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आयोडीन की कमी के 7 संकेत (7 Signs of Iodine Deficiency)
1. हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना
रात में अच्छी नींद लेने के बाद भी क्या सुबह उठते ही थकान महसूस होती है? दिनभर काम करने का मन नहीं करता या शरीर में सुस्ती बनी रहती है? इसकी एक वजह आयोडीन की कमी से प्रभावित थायरॉइड हार्मोन भी हो सकते हैं। जब शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम बनते हैं, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है। इससे व्यक्ति को सामान्य काम करने में भी थकावट महसूस हो सकती है।
2. बिना ज्यादा खाए वजन बढ़ना
अगर आपकी डाइट और दिनचर्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी वजन बढ़ रहा है, तो थायरॉइड की जांच करवाना जरूरी हो सकता है। आयोडीन की कमी से होने वाले हाइपोथायरॉइडिज्म में शरीर कैलोरी का इस्तेमाल धीमी गति से करता है। इससे वजन बढ़ सकता है। हालांकि, वजन बढ़ने के पीछे खानपान, शारीरिक गतिविधि और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
3. गर्दन के अगले हिस्से में सूजन आना
आयोडीन की लंबे समय तक कमी रहने पर गर्दन के सामने सूजन दिखाई दे सकती है। इसे घेंघा या गॉइटर (Goiter) कहते हैं। जब थायरॉइड ग्रंथि को हार्मोन बनाने के लिए पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता, तो वह आकार में बढ़ सकती है। शुरुआत में सूजन हल्की हो सकती है। लेकिन ज्यादा बढ़ने पर गले में दबाव, निगलने में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। गर्दन में किसी भी नई सूजन की डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
4. बालों का पतला होना और ज्यादा झड़ना
बालों का लगातार झड़ना सिर्फ मौसम या हेयर केयर से जुड़ी परेशानी नहीं है। थायरॉइड हार्मोन बालों के सामान्य विकास में भी भूमिका निभाते हैं। आयोडीन की कमी के कारण थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगें, तो बाल रूखे, कमजोर और पतले हो सकते हैं। हालांकि, बाल झड़ने की वजह आयरन की कमी, तनाव, आनुवंशिक कारण या दूसरी पोषण संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
5. सामान्य मौसम में भी ज्यादा ठंड लगना
क्या आपको दूसरों के मुकाबले ज्यादा ठंड लगती है? कमरे का तापमान सामान्य होने पर भी स्वेटर या कंबल की जरूरत महसूस होती है? यह कम सक्रिय थायरॉइड का संकेत हो सकता है। थायरॉइड हार्मोन शरीर में गर्मी पैदा करने और तापमान बनाए रखने में मदद करते हैं। इन हार्मोन की कमी होने पर ठंड सहन करने की क्षमता कम हो सकती है।
6. याददाश्त कमजोर होना और ध्यान न लगना
किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी, छोटी-छोटी बातें भूलना या सोचने-समझने में सुस्ती महसूस होना भी हाइपोथायरॉइडिज्म से जुड़ा हो सकता है। आयोडीन की गंभीर कमी, खासकर गर्भावस्था और बचपन में, मस्तिष्क के विकास पर असर डाल सकती है। वयस्कों में थायरॉइड हार्मोन कम होने पर एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी शिकायतें सामने आ सकती हैं।
7. त्वचा का रूखा होना और कब्ज की परेशानी
अगर त्वचा पहले से ज्यादा रूखी रहने लगी है और मॉइस्चराइजर लगाने के बाद भी खिंचाव महसूस होता है, तो इसके पीछे थायरॉइड हार्मोन की कमी एक संभावित कारण हो सकती है। इसी तरह, मेटाबॉलिज्म और आंतों की गतिविधि धीमी होने से कब्ज की समस्या भी हो सकती है। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब हमेशा आयोडीन की कमी नहीं होता।
आयोडीन की कमी से थायरॉइड पर क्या असर पड़ता है
थायरॉइड गर्दन में मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि है। यह T3 और T4 नाम के हार्मोन बनाती है। इन हार्मोन को बनाने के लिए आयोडीन जरूरी है। पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलने पर हार्मोन का उत्पादन घट सकता है और शरीर थायरॉइड ग्रंथि को ज्यादा काम करने का संकेत देता है। लंबे समय तक ऐसा होने से ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है।
यह समझना भी जरूरी है कि हर थायरॉइड समस्या आयोडीन की कमी के कारण नहीं होती। हाशिमोटो जैसी ऑटोइम्यून बीमारी भी हाइपोथायरॉइडिज्म की एक प्रमुख वजह है। ऐसे में बिना जांच के आयोडीन सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक हो सकता है।
आयोडीन की कमी दूर करने के लिए क्या खाएं
भारतीय खानपान में आयोडीन की जरूरत पूरी करने का सबसे आसान तरीका आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है। इसके अलावा दूध, दही और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों से भी आयोडीन मिल सकता है। मछली और समुद्री भोजन भी इसके स्रोत हैं।
वयस्कों को सामान्य तौर पर रोजाना लगभग 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान यह जरूरत बढ़ जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयोडीन की मात्रा बढ़ाने के लिए ज्यादा नमक खाना शुरू कर दिया जाए। नमक का सेवन सीमित ही रखना चाहिए।
आयोडीन की कमी का पता कैसे चलता है
अगर थकान, वजन बढ़ना, कब्ज, ज्यादा ठंड लगना या गर्दन में सूजन जैसे लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। TSH और Free T4 जैसे ब्लड टेस्ट से थायरॉइड की कार्यक्षमता का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, ये टेस्ट सीधे आयोडीन की कमी की पुष्टि नहीं करते। आयोडीन की स्थिति का आकलन करने के लिए विशेष जांच की जरूरत पड़ सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। बताए गए लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। जांच और उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
