India Health Summit 2025: दिल्ली में आयोजित 'टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट एंड अवॉर्ड्स 2025' में भारत की हेल्थकेयर कहानी के नए अध्याय पर चर्चा हुई। इस मंच पर देशभर के पॉलिसी मेकर्स, डॉक्टर, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स एक साथ आए, जिनका मकसद था ये समझना कि कैसे भारत की सेहत व्यवस्था को और मजबूत, सुलभ और टिकाऊ बनाया जा सकता है। इस खास मौके पर 103 लोगों को हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने काम से समाज में बदलाव की मिसाल पेश की है।
भारत की हेल्थकेयर कहानी
भारत की हेल्थकेयर कहानी
भारत आज सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक ग्लोबल हेल्थकेयर पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। करीब 500 अरब डॉलर का यह सेक्टर अस्पतालों, फार्मा, बायोटेक और हेल्थटेक इंडस्ट्री में लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है। टेलीमेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल हेल्थ जैसे इनोवेशन ने इलाज को घर-घर तक पहुंचा दिया है। इस समिट का मकसद यही था कि अब तक की उपलब्धियों को समझना और आगे का रास्ता तय करना, ताकि हर भारतीय को बेहतर इलाज और स्वस्थ जीवन मिल सके।
1.1% से 2% तक तक का सफर
समिट की मुख्य अतिथि श्रीमती अनुप्रिया पटेल, राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार) ने हेल्थ समिट में कहा, 'भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। पहले देश अपने GDP का सिर्फ 1.1% स्वास्थ्य पर खर्च करता था, आज यह बढ़कर करीब 2% तक पहुंच गया है। हमारा लक्ष्य इसे 2.5% तक ले जाने का है, जैसा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में तय किया गया है।'
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) ने करोड़ों परिवारों को राहत दी है। 'अब तक 62 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मिल चुका है। 81 करोड़ से ज्यादा ABHA ID (आयुष्मान भारत अकाउंट) बनाए जा चुके हैं और 73 करोड़ लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम से जुड़े हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ नेटवर्क में से एक है।'
मेडिकल एजुकेशन और अस्पतालों का विस्तार
राज्य मंत्री ने आगे बताया कि पिछले 11 सालों में भारत ने मेडिकल शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त बढ़त हासिल की है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 809 हो गई है और AIIMS की संख्या 7 से बढ़कर 23 तक पहुंच गई है उन्होंने कहा, 'पहले जहां लोग अपनी जेब से इलाज का 63% खर्च उठाते थे, अब यह घटकर सिर्फ 39.4% रह गया है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये करोड़ों परिवारों की आसानी, उम्मीद और सम्मान की कहानी हैं।'
स्वस्थ भारत ही विकसित भारत का लक्ष्य
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अब वक्त है कि हेल्थ को सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, साझा मिशन के तौर पर देखा जाए। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, अमृत फार्मेसी, नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम, और Free Drugs & Diagnostics Initiative जैसी योजनाएं आज देश के हर स्तर पर सब-सेंटर, PHC, CHC से लेकर जिला अस्पताल तक लोगों को राहत दे रही हैं। अगर सरकारी योजनाओं के साथ निजी क्षेत्र और समुदाय मिलकर काम करें, तो 2047 तक ‘सशक्त, स्वस्थ और विकसित भारत’ का सपना जरूर पूरा होगा।'
मरीजों के लिए नई पारदर्शी रैंकिंग सिस्टम
मरीजों को बेहतर विकल्प देने के लिए Times Network ने एक राष्ट्रीय अस्पताल सर्वे और रैंकिंग प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। इससे लोगों को पता चलेगा कि कौन से अस्पताल बेहतर सुविधाएं और सेवाएं दे रहे हैं। पहले चरण में देश के टॉप 5 मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल ग्रुप्स की लिस्ट जारी की गई।
तकनीक, इनोवेशन और रिसर्च से बदलेगा भविष्य
समिट में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का भविष्य इनोवेशन, किफायती इलाज, प्रिवेंटिव हेल्थ और डिजिटल हेल्थ पर टिका है। AI और रिसर्च की मदद से देश एक ऐसी हेल्थ सिस्टम बना सकता है जो हर व्यक्ति तक पहुंच सके, सस्ती हो और टिकाऊ भी। यह समिट इस बात का प्रतीक रहा कि भारत अब सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं,
बल्कि लोगों की जिंदगी में सेहत और भरोसा लौटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
समिट के सहयोगी पार्टनर
- यह आयोजन INTAS द्वारा पावर्ड था, Novartis और All Out को-पावर्ड पार्टनर रहे।
- MGR University नॉलेज पार्टनर, FIT INDIA सपोर्टिंग पार्टनर,
- OneXtel स्ट्रैटेजिक एलायंस पार्टनर, Nuvama वेल्थ पार्टनर
- और Heights आउटडोर पार्टनर रहे।
'टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट एंड अवॉर्ड्स' ने साफ कर दिया कि भारत अब हेल्थकेयर में केवल मरीजों का इलाज नहीं, बल्कि एक परिवर्तन की कहानी लिख रहा है। सरकारी योजनाएं, डिजिटल हेल्थ मिशन और डॉक्टरों का समर्पण - सब मिलकर उस भारत की नींव रख रहे हैं, जहां हर नागरिक को बेहतर इलाज और स्वस्थ जीवन मिले।
