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आंखों के स्वास्थ्य के लिए खास माने जाते हैं इस पेड़ के पत्ते, आचार्य बालकृष्ण ने बताया कैसे आते हैं काम

Sheesham Leaves for Eye Problems: आंखों में लालिमा, जलन और दर्द के लिए शीशम के पत्तों का पारंपरिक नुस्खा क्या है? आचार्य बालकृष्ण से जानें इसके इस्तेमाल का तरीका, वैज्ञानिक प्रमाण और जरूरी सावधानियां।

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आंखों की जलन में शीशम के पत्ते कितने कारगर (AI Image)

Sheesham Leaves for Eye Problems: आंखों में लालिमा, जलन या दर्द होना आम समस्या है। कई बार धूल-मिट्टी, प्रदूषण या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में परेशानी होने लगती है। वहीं, कुछ लोगों को सुबह उठते ही आंखों में चुभन या भारीपन महसूस होता है। ऐसी समस्याओं से राहत पाने के लिए लोग घरेलू नुस्खे भी आजमाते हैं। इन्हीं में एक पारंपरिक प्रयोग शीशम के पत्तों से जुड़ा है। एक वीडियो में बताया गया है कि शीशम के ताजे पत्तों को पीसकर आंखों के ऊपर रखने की परंपरा रही है। लेकिन क्या यह तरीका वाकई सुरक्षित और असरदार है? आइए आचार्य बालकृष्ण से समझते हैं।

आंखों के लिए शीशम के पत्तों का पारंपरिक प्रयोग

शीशम का पेड़ भारत में कई जगह पाया जाता है। इसकी लकड़ी के साथ पत्तों का इस्तेमाल भी कुछ पारंपरिक उपचारों में किया जाता रहा है। वीडियो में आंखों की लालिमा, जलन और लंबे समय से होने वाले दर्द के संदर्भ में शीशम के पत्तों के एक पुराने घरेलू प्रयोग की चर्चा की गई है।

इसमें ताजे पत्तों को पीसकर तैयार की गई टिकिया को आंखों के ऊपर रखने का उल्लेख है। हालांकि, यह एक पारंपरिक मान्यता है। आंखों की लालिमा, जलन या दर्द के इलाज में शीशम के पत्तों की प्रभावशीलता और सुरक्षा के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

शीशम के पत्तों की टिकिया कैसे बनाई जाती है

वीडियो में बताए गए पारंपरिक तरीके के अनुसार, सबसे पहले शीशम के साफ और ताजे पत्ते लिए जाते हैं। इसके बाद पत्तों को अच्छी तरह पीसकर उनका गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट से छोटी टिकिया बनाने और उसे बंद आंखों के ऊपर रखकर पट्टी बांधने की चर्चा की गई है।

हालांकि, इस विधि को घर पर आजमाने की सलाह नहीं दी जाती। पत्तों पर मौजूद धूल, बैक्टीरिया या अन्य पदार्थ आंखों में संक्रमण और जलन बढ़ा सकते हैं। पेस्ट का थोड़ा हिस्सा भी आंख के भीतर चला जाए तो परेशानी हो सकती है। आंखों पर पट्टी बांधने से भी समस्या छिप सकती है और सही इलाज में देरी हो सकती है।

आंखों में लालिमा और जलन क्यों होती है

आंखों का लाल होना हमेशा थकान का संकेत नहीं होता। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे आंखों में सूखापन, एलर्जी, कंजंक्टिवाइटिस या कॉर्निया से जुड़ी समस्या। लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप देखने से भी आंखों में सूखापन और असहजता बढ़ सकती है।

अगर आंखों में लगातार दर्द हो रहा है, रोशनी से परेशानी हो रही है या धुंधला दिखाई दे रहा है, तो इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आंखों में जलन होने पर क्या करें

हल्की जलन या थकान होने पर आंखों को आराम दें। स्क्रीन से बीच-बीच में ब्रेक लें। आंखों को बार-बार रगड़ने से बचें। बंद पलकों पर साफ, ठंडे पानी से भीगा कपड़ा कुछ मिनट रखने से हल्की असहजता में राहत मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ध्यान रखें: आंखों में तेज दर्द, अचानक धुंधला दिखना, रोशनी से परेशानी या लगातार लालिमा होने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। शीशम के पत्तों सहित किसी भी जड़ी-बूटी का पेस्ट आंखों में या पलकों पर लगाकर उपचार करने से बचें। पारंपरिक नुस्खों की जानकारी होना अलग बात है, लेकिन आंखों की सुरक्षा के लिए प्रमाणित इलाज को प्राथमिकता देना जरूरी है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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