बाजार में मिलने वाले अधिकतर पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड्स पर हाई प्रोटीन, मल्टीग्रेन या लो फैट जैसे बड़े-बड़े दावे लिखे होते हैं। हालांकि फूड फार्मर के नाम से फेमस हेल्थ इंफ्लुएंसर रेवंत हिमातसिंका आगाह करते हैं कि पैकेट पर लिखे दावों पर आंख मूंद करके भरोसा करना सेहत को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा सकता है।यां साझा की हैं।
खाने की चीजें खरीदते समय किन बातों का दें ध्यान, फूड फार्मर रेवंत हिमातसिंका के बताया सही तरीका (Photo: iStock)
रेवंत हिमातसिंका के मुताबिक, हमारे देश में लोग पढ़े-लिखे तो हैं लेकिन उतने ज्यादा हेल्थ एजुकेटेड नहीं हैं। शायद इसी कारण कोई भी खाने-पीने की चीज खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत या वेज/नॉन-वेज का निशान ही देखते हैं। जबकि उस प्रोडक्ट की असली जानकारी हमेशा पैकेट के पीछे दिए गए न्यूट्रिशन लेबल और इंग्रीडिएंट्स (सामग्री) की लिस्ट में छिपी होती है।
हाई प्रोटीन और मल्टीग्रेन का सच
पैकेज्ड प्रोडक्ट्स पर लिखे बड़े-बड़े दावों का सच बयां करते हुए फूड फार्मर कहते हैं:
नाम का प्रोटीन: कई प्रोडक्ट्स पर हाई प्रोटीन लिखा होता है, लेकिन जब आप उनके पीछे की सामग्री चेक करते हैं, तो उसमें महज 2 से 3 ग्राम प्रोटीन ही निकलता है।
ब्रेड बनाम रोटी: बाजार में मिलने वाले मल्टीग्रेन या हाई-फाइबर का दावा करने वाले ब्रेड की तुलना में घर में बनी साधारण रोटी कहीं ज्यादा स्वस्थ और सुरक्षित विकल्प है।
प्रोटीन के सही सोर्स: शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन की आपूर्ति के लिए पैकेज्ड स्नैक्स के बजाय पनीर, टोफू और घर में बना ताजा खाना चुनना चाहिए।
भारतीय ड्रिंक्स में 3 गुना ज्यादा चीनी?
रेवंत हिमातसिंका के अनुसार, भारत में बिकने वाले कुछ लोकप्रिय ब्रांडेड सॉफ्ट ड्रिंक्स में यूरोपीय देशों की तुलना में काफी अधिक चीनी पाई जाती है। उनके मुताबिक, भारत में मिलने वाले कुछ कोल्ड-ड्रिंक्स में यूरोप के मुकाबले करीब 3 गुना ज्यादा चीनी होती है। इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं- कमजोर रेगुलेशन्स, उपभोक्ताओं की कीमत को लेकर संवेदनशीलता और आम लोगों में जागरूकता की कमी।
क्या चीनी सचमुच जहर है?
चीनी को पूरी तरह जहर मानने की धारणा को खारिज करते हुए रेवंत कहते हैं कि सीमित और संतुलित मात्रा में चीनी का सेवन नुकसानदायक नहीं है। असली समस्या तब पैदा होती है जब लोग बिना जाने ही डिब्बाबंद खानपान और ड्रिंक्स के जरिए हर दिन भारी मात्रा में हिडेन शुगर का सेवन करने लगते हैं।
पेरेंट्स और युवाओं के लिए सलाह
माता-पिता को बच्चों के टिफिन में नूडल्स, ब्रेड या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स देने से बचना चाहिए। बच्चों को हमेशा घर का बना ताजा खाना ही देना चाहिए। कोई भी पैकेटबंद सामान खरीदने से पहले उसके इंग्रीडिएंट्स को ध्यान से पढ़ने की आदत बनाएं। उद्देश्य सिर्फ हेल्दी खाना खोजना ना हो। यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जो भी आप खा रहे हैं वह शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो।
