हर वक्त की टेंशन कर रही है ब्रेन पर वार, हार्मोन असंतुलन से घट रही याददाश्त, ओवरथिंकिंग के पीछे की है बड़ी वजह

लगातार ओवरथिंकिंग और तनाव न सिर्फ मानसिक शांति छीन रहा है, बल्कि हार्मोन का संतुलन बिगाड़कर याददाश्त भी कमजोर कर रहा है। बढ़ता कोर्टिसोल लेवल दिमाग की कार्यक्षमता पर असर डालता है, जिससे नींद, ऊर्जा और फोकस पर बुरा असर पड़ता है। जानें, कैसे योग, प्राणायाम और मेडिटेशन से ब्रेन को दोबारा मिले सुकून और हेल्दी बैलेंस।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में टेंशन हमारी रोजमर्रा की साथी बन चुकी है। काम का दबाव, रिश्तों की खींचतान और भविष्य की चिंता इन सबके बीच इंसान लगातार ओवरथिंकिंग में डूबा रहता है। यही ओवरथिंकिंग धीरे-धीरे हमारे शरीर और दिमाग पर गहरा असर डालती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब दिमाग लगातार एक ही बात पर सोचता रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो आगे चलकर हार्मोनल असंतुलन और याददाश्त की कमजोरी का कारण बनता है।

हर वक्त टेंशन की वजह

हर वक्त टेंशन की वजह

बढ़ता कोर्टिसोल बिगाड़ रहा है हार्मोन का संतुलन

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब इंसान लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर की ‘फाइट ऑर फ्लाइट’ प्रतिक्रिया एक्टिव रहती है। इससे कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसा रहने से एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, टेस्टोस्टेरोन और थायरॉइड हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इसका असर मेटाबॉलिज्म, वजन, और ऊर्जा पर पड़ता है। पेट के आसपास चर्बी बढ़ने लगती है, नींद की कमी होती है और मूड में उतार-चढ़ाव आता है।

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