आज के समय में कोलस्ट्रॉल शब्द को लेकर लोगों के मन में एक अजीब सा डर बैठ गया है। अधिकांश लोगों का मानना है कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना किसी खतरे की घंटी या बीमारी की निशानी है। हालांकि, जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा इस धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हैं। वो कहते हैं कि कोलेस्ट्रॉल को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। बकौल डॉक्टर चोपड़ा उनका खुद का कोलेस्ट्रॉल लेवल 325 है और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
क्या वाकई में खतरनाक होता है कॉलेस्ट्रॉल (Photo: iStock)
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
डॉ. चोपड़ा के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल कोई दुश्मन नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के लिए एक बेहद जरूरी तत्व है। लोग अक्सर सोचते हैं कि कोलेस्ट्रॉल सिर्फ बाहर से यानी खान-पान के जरिए शरीर में पहुंचता है, जबकि सच्चाई यह है कि शरीर का लगभग 85% कोलेस्ट्रॉल खुद हमारा शरीर अंदर ही बनाता है। जो चीज हमारा शरीर खुद तैयार करता है, वह हमारे लिए हानिकारक कैसे हो सकती है? हमारे शरीर को हॉर्मोन बनाने, विटामिन डी तैयार करने और स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है।
इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल हमारी इम्युनिटी को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। यह बैक्टीरिया को बेअसर करने, इन्फेक्शन को नियंत्रित करने, शरीर को नुकसान से बचाने और बीमारियों से रिकवरी में मदद करता है। यही वजह है कि मौसम बदलने, तनाव होने, सर्जरी के बाद या किसी इन्फेक्शन के दौरान शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर प्राकृतिक रूप से ऊपर-नीचे होता रहता है।
क्या सिर्फ एक रिपोर्ट देखकर डरना सही है?
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल का एक नंबर देखकर घबरा जाना सही नहीं है। आज के दौर में केवल एलडीएल या कुल कोलेस्ट्रॉल को विलेन मान लेना गलत है। हृदय स्वास्थ्य केवल एक ब्लड टेस्ट रिपोर्ट पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इसके लिए व्यक्ति की जीवनशैली, खान-पान, तनाव का स्तर, नींद और अन्य मेटाबोलिक स्वास्थ्य को देखना जरूरी होता है।
कई बार तनाव, बीमारी, डिहाइड्रेशन या सर्जरी की वजह से भी लिपिड प्रोफाइल में बदलाव आ सकता है। इसलिए एक बार रिपोर्ट असामान्य आने पर तुरंत घबराने की जरूरत नहीं होती, बल्कि डॉक्टर की सलाह से कुछ हफ्तों बाद दोबारा जांच कराई जा सकती है।
संक्षेप में कहें तो कोलेस्ट्रॉल अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक जरूरी घटक है। जरूरत इस बात की है कि किसी एक पोषक तत्व या सिंगल टेस्ट से डरने के बजाय एक संतुलित जीवनशैली अपनाई जाए और दिल की सेहत को समग्र रूप से समझा जाए।
