कोविड महामारी के दौरान जन्में शिशुओं की आंत में कम हुए बैक्टीरिया, स्टडी में खुलासा, जानें क्या हो सकता है बच्चों पर इसका असर

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  • Updated Sep 2, 2023, 09:17 AM IST

वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि जिन शिशुओं ने जन्‍म के बाद पहला साल कोविड-19 महामारी के दौरान बिताया है, उनकी आंत में पहले पैदा हुए बच्‍चों की तुलना में कम बैक्टीरिया पाए गए हैं। साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चला है कि जिन शिशुओं की आंत के बैक्‍टीरिया का महामारी के दौरान नमूना लिया गया था, उनमें आंत के माइक्रोबायोम की अल्फा विविधता कम थी, जिसका अर्थ है कि आंत में बैक्टीरिया की कम प्रजातियां थीं।

वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि जिन शिशुओं ने जन्‍म के बाद पहला साल कोविड-19 महामारी के दौरान बिताया है, उनकी आंत में पहले पैदा हुए बच्‍चों की तुलना में कम बैक्टीरिया पाए गए हैं। साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चला है कि जिन शिशुओं की आंत के बैक्‍टीरिया का महामारी के दौरान नमूना लिया गया था, उनमें आंत के माइक्रोबायोम की अल्फा विविधता कम थी, जिसका अर्थ है कि आंत में बैक्टीरिया की कम प्रजातियां थीं। शिशुओं में पाश्चुरैलेसी और हेमोफिलस बैक्टीरिया की कम थे, जो मनुष्यों के भीतर रहते हैं और विभिन्न संक्रमणों का कारण बन सकते हैं।

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न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में कहा कि यह परिवर्तन कोविड-19 महामारी के कारण हुए हैं। इसके लिए सामाजिक बदलाव भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं। इन बदलावों के पीछे संभावित रूप से घर पर अधिक समय बिताना, डेकेयर में अन्य बच्चों से अलग रखना, साफ-सफाई में इजाफा, बेहतर पर्यावरण, अच्‍छा आहार, स्तनपान और सही देखभाल कारण हो सकते हैं।

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