Ayurvedic Tips To Stay Cool In Hot Summer: गर्मी के मौसम में अचानक पसीना आना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी या सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हैं। लेकिन ये सिर्फ मौसम की वजह से नहीं होतीं। आयुर्वेद के अनुसार, ऐसा पित्त दोष बढ़ने का संकेत है। पित्त हमारे शरीर में गर्मी, पाचन और बदलाव के लिए जिम्मेदार होता है। जब पित्त असंतुलित हो जाता है तो गर्मी, पसीना, एसिडिटी, नींद की दिक्कत और त्वचा की समस्याएं जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हेल्थ इन्फ्लूएंसर और आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर दीक्षा भावसर बताती हैं कि कुछ सरल घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर आप गर्मी से होने वाले तनाव को कम कर सकते हैं और शरीर व दिमाग दोनों को ठंडा रख सकते हैं।
शरीर को ठंडा रखने के लिए आयुर्वेदिक उपाय
नारियल पानी और किशमिश से तुरंत ठंडक
नारियल पानी गर्मी में शरीर को तुरंत ठंडा करता है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स भरता है और पित्त को संतुलित रखता है। सुबह या दोपहर के समय ताजे नारियल पानी का सेवन करें। इसके साथ रातभर भिगोई हुई किशमिश भी फायदेमंद होती है। यह खून को पोषण देती है, हार्मोन संतुलन बनाए रखती है और शरीर की आंतरिक गर्मी कम करती है। आयुर्वेद में नारियल और किशमिश दोनों को शीतला (ठंडा) माना गया है।
साबजा, सौंफ और धनिया के बीज
गर्मियों में साबजा (तुलसी के बीज) तुरंत ठंडक देते हैं। इसे पानी में भिगोकर नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ में डालकर पी सकते हैं। सौंफ और धनिया के बीज रातभर पानी में भिगोकर सुबह पीने से पित्त शांत रहता है, पाचन सुधरता है और अचानक गर्मी के झटके कम होते हैं। आयुर्वेद में इन्हें पित्त-शामक और ठंडक देने वाले उपाय माना गया है।
पैरों की मालिश और नस्य
शाम को पैरों की हल्की मालिश करना सिर्फ आराम नहीं देता, बल्कि शरीर की गर्मी भी कम करता है। इसके लिए हल्का गरम A2 गाय का घी इस्तेमाल करें। इसके साथ ही नस्य, यानी नाक में गर्म घी या अनु तेल डालना, दिमाग को शांत रखता है और अचानक गर्मी के झटके कम करता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसर के अनुसार, यह पित्त और प्राण वायु को संतुलित करने का प्राचीन तरीका है।
शीतली और शीतकारी प्राणायाम
यदि गर्मी और तनाव से तुरंत राहत चाहिए तो शीतली या शीतकारी प्राणायाम सबसे असरदार हैं। रोज़ाना 5 मिनट के लिए जीभ या दांतों के बीच से सांस अंदर लें और नाक से छोड़ें। यह न सिर्फ शरीर की आंतरिक गर्मी कम करता है, बल्कि दिमाग को शांत और स्ट्रेस-फ्री भी रखता है।
खाने और जीवनशैली में बदलाव
गर्मियों में पित्त बढ़ाने वाले खाने जैसे तीखे मसाले, तली-भुनी चीजें, शराब, कैफीन और खट्टे पदार्थ कम करें। इसके साथ ही शाम को 20-30 मिनट की हल्की सैर या कूलिंग योग-प्राणायाम करना फायदेमंद है। इससे रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है और शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
छोटे-छोटे रोजमर्रा के उपाय
गर्मी में ठंडा और स्ट्रेस-फ्री रहना मुश्किल नहीं। थोड़ा ध्यान, सही खाने-पीने की आदतें, छोटे-छोटे आयुर्वेदिक उपाय और रोज़ाना 5-10 मिनट के प्राणायाम से आप गर्मी के दिन भी आराम और ताजगी भरे रख सकते हैं। इस तरह आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसर के बताए हुए उपाय अपनाकर आप हीटवेव में भी खुद को ठंडा, शांत और स्ट्रेस-फ्री महसूस कर सकते हैं।
