Nepal New Coin: पड़ोसी देश नेपाल अपना नया सिक्का लेकर आया है लेकिन इस सिक्के में उसने एक अहम बदलाव किया है। इस नए सिक्के में उसने अपने राजनीतिक रूप संवेदनशील नक्शे को हटा दिया है। इस नक्शे को लेकर भारत के साथ उसका लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। अपने इस अहम कदम के पीछे नेपाल सरकार का कहना है कि सिक्कों में बदलाव की यह सामान्य प्रक्रिया है लेकिन एक्सपर्ट इसे भारत के साथ अपने रिश्ते को सामान्य एवं प्रगाढ़ बनाने की एक कोशिश के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, भारत-नेपाल क्षेत्रीय सीमा की जहां तक बात है तो नेपाल ने अपना आधिकारिक रुख कायम रखा है।
नेपाल सरकार के एक रुपए के नए सिक्के में अहम बदलाव।
विवादित नक्शे को हटाया जाना सकारात्मक कदम
सिक्के में बदलाव की यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत और नेपाल कारोबार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी एवं सीमा पार बुनियादी संरचना विकास जैसे क्षेत्रों में अपना सहयोग और मजबूत करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के समय सीमा विवाद को लेकर आपसी रिश्तों में जो कड़वाहट आई उसके बाद आपसी संबंध पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाए हैं। पीएम बनने के बाद बलेंद्र 'बालेन' शाह ने दोनों देशों के बीच पहले जैसा भरोसा कायम करने वाला कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। पीएम पद की कमान संभालने के बाद बालेन ने मोटे तौर पर विवादित मुद्दों को अपने सरकार की कार्यशैली से दूर रखते हुए विकास एवं निवेश को प्राथमिकता दी है। पीएम बनने के बाद बालेन ने कहा कि उनकी सरकार देश हित को ध्यान में रखकर काम करेगी और पूर्वाग्रहों के आधार पर फैसले नहीं लेगी। अब नए सिक्के से विवादित नक्शे को हटाया जाना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सिक्के पर अब अंकित होगा घर गुम्बा मोनेस्ट्री
पिछले सप्ताह नेपाल की मंत्रिपरिषद ने नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के तहत एक औ दो रुपए के नए डिजाइन वाले सिक्के मुद्रित होने हैं। सबसे बड़ी खास बात एक रुपए की कीमत वाले सिक्के के पुनर्डिजाइन के बारे में है। इस सिक्के पर नेपाल का संशोधित राजनीतिक नक्शा अंकित नहीं होगा। ओली के समय में नेपाल का जो संशोधित राजनीतिक नक्शा प्रकाशित हुआ था उसमें भारतीय इलाकों लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपना बताया गया था। ओली सरकार के इस कदम का भारत सरकार ने विरोध किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नक्शे में बदलाव से जमीन की हकीकत नहीं बदल जाती। अब इस नए एक रुपए के सिक्के के दूसरी तरफ लो घ्याकर मानेस्ट्री जिसे घर गुम्बा के नाम से जाना जाता है, उसका चित्र अंकित होगा। यह मोनेस्ट्री मुस्टांग जिले के मरांग गांव में स्थित है। यह नेपाल के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में से एक है। समझा जाता है कि यह मठ आठवीं-नौवीं शताब्दी का है और देश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत में इसका एक अहम स्थान है।
सिक्कों का आकार और वजन कम किया गया
कैबिनेट सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि दो रुपये के सिक्के पर पहले से स्वीकृत राजनीतिक नक्शा फिलहाल बना रहेगा। हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) का कहना है कि एक रुपये के सिक्के के नए डिजाइन में बदलाव का मुख्य कारण तकनीकी और निर्माण संबंधी आवश्यकताएं हैं, न कि राजनीति। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के अनुसार, नए डिजाइन का प्रस्ताव नेपाल के प्रचलन में मौजूद सिक्कों को आधुनिक बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसके तहत सिक्कों का आकार और वजन कम किया गया है तथा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली धातु भी बदली गई है।
नए मानकों के अनुसार:
एक रुपये के सिक्के का वजन 4 ग्राम से घटाकर 3.2 ग्राम किया जाएगा।दो रुपये के सिक्के का वजन 5 ग्राम से घटाकर 3.8 ग्राम किया जाएगा।
नए सिक्के अब मिश्रित धातु की बजाय स्टील से बनाए जाएंगे। इसके चलते उनका रंग पहले के पीलेपन की जगह स्टील जैसा सफेद दिखाई देगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिक्के का आकार छोटा होने के कारण नेपाल के संशोधित राजनीतिक नक्शे की बारीक आकृति को स्पष्ट रूप से उकेरना संभव नहीं था। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, छोटे सिक्के पर विस्तृत नक्शा छापने से उसकी स्पष्टता और पठनीयता प्रभावित होती, इसलिए डिजाइन में बदलाव करना पड़ा।
भारत के प्रति कैसी है नई बालेन शाह सरकार की नीति?
इस साल मार्च में हुए आम चुनाव के बाद 36 वर्षीय स्ट्रक्चरल इंजीनियर और काठमांडू के पूर्व मेयर बलेन्द्र 'बालेन' शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बनाई। बालेन शाह का सत्ता में आना नेपाल की राजनीति में हाल के वर्षों के सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है। उन्होंने झापा-5 संसदीय सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर जीत दर्ज की और 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके साथ ही वे उस समय दुनिया के सबसे युवा कार्यरत प्रधानमंत्री भी बने। बालेन शाह सरकार ने विदेश नीति को प्रतीकात्मक टकराव की बजाय आर्थिक विकास और परिणामों के नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
निवेश बढ़ाने पर शाह का ज्यादा जोर
लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मतभेदों को द्विपक्षीय संबंधों पर हावी होने देने के बजाय, सरकार ने निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन, ऊर्जा क्षेत्र से राजस्व बढ़ाने और सीमा-पार संपर्क (कनेक्टिविटी) मजबूत करने जैसी पहलों को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पहले अंतरराष्ट्रीय नेताओं में शामिल थे जिन्होंने बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें बधाई दी थी। इसे कई विश्लेषकों ने इस संकेत के रूप में देखा कि नई दिल्ली नेपाल के नए नेतृत्व के साथ रचनात्मक और सकारात्मक संबंध विकसित करने की इच्छुक है। मौजूदा सरकार का व्यापक दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि वह घरेलू राजनीतिक संदेशों को दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं से अलग रखकर आगे बढ़ना चाहती है।
नेपाल के विकास में है भारत का अहम योगदान
हाल के महीनों में आर्थिक सहयोग भारत-नेपाल संबंधों का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच 9.38 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ, जो नेपाल की अर्थव्यवस्था में भारत के महत्व को रेखांकित करता है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख ट्रांजिट (पारगमन) मार्ग बना हुआ है। नेपाल के 60 प्रतिशत से अधिक विदेशी व्यापार में भारत की हिस्सेदारी है, जबकि नेपाल के 80 प्रतिशत से अधिक निर्यात का गंतव्य भी भारत ही है। सिर्फ वस्तुओं के व्यापार तक ही नहीं, बल्कि दोनों देशों ने परिवहन, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी सहयोग को लगातार बढ़ाया है। इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP), सीमा-पार रेल परियोजनाएं और भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) तथा नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL) के बीच डिजिटल भुगतान कनेक्टिविटी जैसी पहलें सीमा-पार व्यापार, पर्यटन और धन प्रेषण (रेमिटेंस) को अधिक सुगम और तेज बना रही हैं।
