US Presidential Election 2024: अमेरिका में चुनाव तो पांच नवंबर को है लेकिन वहां वोटिंग चल रही है। यानी लोग रोजाना मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डाल रहे हैं। आप कहेंगे कि यह किस तरह का मतदान है जो कई सप्ताह पहले शुरू हो गया है। तो हम आपको बता रहे हैं कि यह किस तरह की वोटिंग है। दरअसल, अमेरिका में चुनाव वाले दिन से पहले आप अपना वोट डाल सकते हैं। इसे अर्ली वोटिंग कहते हैं। अर्ली वोटिंग में मतदाता सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर जाकर अपना वोट देते हैं। मेल के जरिए भी आप अपना वोट डाल सकते हैं। कई बार ऐसा होता है कि मतदान वाले दिन किसी वजह से लोग अपना वोट नहीं डाल पाते, उनके लिए यह अर्ली वोटिंग सिस्टम काफी उपयोगी है। अमेरिका में ज्यादातर राज्य अपने यहां अर्ली वोटिंग की व्यवस्था करते हैं। राज्य एक स्थान तय करते हैं और उस स्थान पर जाकर मतदाता वोट डालते हैं।
अमेरिका में अर्ली वोटिंग चल रही है।
तीन राज्यों में चल रही अर्ली वोटिंग
अमेरिका के मिनेसोटा, साउथ डकोटा और वर्जीनिया में मतदान केंद्रों पर वोटिंग जारी है तो कुछ अन्य राज्य मेल के जरिए वोटिंग प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। अर्ली वोटिंग सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे मतदान ज्यादा होता है। एक दिन ही मतदान करना है, ऐसी बाध्यता नहीं होती। अमेरिका में पांच नवंबर को मतदान होना है, यह बात सभी को पता है लेकिन 50 राज्यों वाले इस देश में सभी लोग एक दिन में मतदान कर पाएं शायद यह संभव नहीं है। दूसरा, बहुत सारे लोग नौकरी पेशे वाले हैं, कारोबारी हैं, बुजुर्ग हैं, बहुत सारे लोग यात्रा और दूसरे देशों में होते हैं तो कई दिव्यांग भी हैं। ऐसे में मतदान का ज्यादा विकल्प होने पर वोटिंग में लोगों की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा होती है।
वोटरों में उत्साह जगाता है अर्ली वोटिंग सिस्टम
अर्ली वोटिंग सिस्टम की एक बड़ी खासियत है कि यह मतदाताओं में जोश और उत्साह बढ़ाता है। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस का समर्थन करने वाली सिंगर टेलर स्विफ्ट ने जब ये कहा कि अर्ली वोटिंग शुरू होने से पहले वह फ्लोरिडा में परफॉर्म करेंगी तो मतदान के लिए डेमोक्रेट युवा वोटरों का उत्साह और रुझान देखने लायक था। अमेरिका के सभी राज्य किसी न किसी रूप में अर्ली वोटिंग की इजाजत देते हैं। अमेरिका के कम के कम आठ ऐसे राज्य हैं जो मेल के जरिए सभी रजिस्टर्ड को बैलेट भेजते हैं। जबकि 14 राज्य ऐसे हैं जो लोगों से यह पूछते हैं कि वे मेल के जरिए मतदान क्यों करना चाहता है? वहीं, ज्यादातर राज्य चुनाव से पहले वोटर्स को मतदान केंद्रों पर आकर वोटिंग करने का मौका देते हैं।
कोविड संकट के बीच हुआ था पिछला चुनाव
पिछले राष्ट्रपति चुनाव यानी 2020 की अगर बात करें तो यह चुनाव कोविड महामारी के संकट के बीच हुआ था। बवजूद इसके 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने चुनाव वाले दिन से पहले अर्ली वोटिंग के दौरान मतदान किया। खास बात यह है कि इस साल जितना मतदान हुआ, उसका यह दो तिहाई था जो कि एक रिकॉर्ड है। अमेरिका में अर्ली वोटिंग सिस्टम लोगों को सहूलियतें तो देता है लेकिन यह भी विवादों से दूर नहीं रह पाया है। वोटिंग की इस व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। 2020 के ही चुनाव में मेल से होने वाली वोटिंग में फर्जीवाड़े के आरोप लगे। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में डेमोक्रेट मतदाता ज्यादातर बैलेट के जरिए मतदान करते आए हैं जबकि रिपब्लिकन वोटर्स चुनाव वाले दिन यानी पांच नवंबर को वोट डालना पसंद करते हैं। काउंटिंग जब शुरू होती है तो ज्यादातर जगहों पर पहले मतदान केंद्रों पर डाले गए वोटों की गिनती शुरू होती है और इसके बाद बैलेट गिने जाते हैं। इस चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड टंप की हार हुई। उन्हें डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन ने हराया था। लेकिन ट्रंप ने अपनी हार नहीं मानी। उन्होंने मेल के जरिए हुई वोटिंग में फ्राड करने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके वोट चुराए गए।
इस बार ट्रंप के सामने कमला हैरिस
बहरहाल, आप अमेरिका की अर्ली वोटिंग सिस्टम को समझ गए होंगे। चुनाव में इस बार रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप का मुकाबला डेमोक्रेट हैरिस से है। रेटिंग की अगर बात करें तो कमला, ट्रंप पर बढ़त बनाई हुई हैं। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, मुकाबला वैसे-वैसे करीबी और दिलचस्प होता जा रहा है।
