Two Person Cockpit Rule Aviation Safety: हाल ही में फ्लाईदुबाई (Flydubai) की उड़ान में सह-पायलट द्वारा मुख्य कैप्टन पर कॉकपिट के भीतर किए गए जानलेवा हमले की घटना ने नागरिक उड्डयन की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉकपिट में हर वक्त दो लोगों की मौजूदगी क्यों है जरूरी? जानिए उन दो विमान हादसों की कहानी जिन्होंने बदल दिए एविएशन सुरक्षा के नियम
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब खतरा किसी बाहरी यात्री या आतंकवादी से नहीं, बल्कि कॉकपिट के भीतर पहले से मौजूद पायलट से ही हो, तो उससे कैसे निपटा जाए?
इतिहास में दो ऐसे खौफनाक विमान हादसे हुए हैं, जिनमें पायलट के अकेले रहने पर हुई घटनाओं ने दुनिया भर के विमानन नियामकों को सुरक्षा नियम बदलने पर मजबूर किया:
इजिप्टएयर फ्लाइट 990 (1999)
जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 (2015)
1. इजिप्टएयर फ्लाइट 990: शुरुआती चेतावनी (31 अक्टूबर 1999)
न्यूयार्क से काहिरा जा रहे 'बोइंग 767' विमान में 217 लोग सवार थे। जब कैप्टन अहमद अल-हबाशी टॉयलेट जाने के लिए कॉकपिट से बाहर निकले, तो रिलीफ फर्स्ट ऑफिसर जमील अल-बतूती अकेले कॉकपिट में रह गए।
घटनाक्रम: अमेरिकी जांच एजेंसी NTSB के अनुसार, अल-बतूती ने ऑटोपायलट बंद कर दिया और विमान को तेजी से नीचे की तरफ मोड़ दिया। कैप्टन जब वापस लौटे और कॉकपिट का दरवाजा खोला, तो दोनों पायलटों के बीच कंट्रोल को लेकर खींचतान हुई। कैप्टन विमान को ऊपर खींचना चाह रहे थे, जबकि अल-बतूती नीचे की तरफ दबाव बना रहे थे।
परिणाम: अंततः विमान अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और सभी 217 लोगों की मौत हो गई।
विवाद: NTSB ने इसे रिलीफ ऑफिसर की हरकतों का नतीजा बताया, जबकि मिस्र के जांचकर्ताओं ने तकनीकी खराबी (एलिवेटर कंट्रोल सिस्टम) को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इस घटना ने पहली बार अकेले बचे पायलट के खतरे को दुनिया के सामने उजागर किया।
2. 9/11 के बाद कॉकपिट डोर सुरक्षा और जर्मनविंग्स त्रासदी (24 मार्च 2015)
2001 में 9/11 हमलों के बाद आतंकवादियों को रोकने के लिए कॉकपिट के दरवाजों को अत्यधिक मजबूत, बुलेटप्रूफ और ऑटो-लॉक सिस्टम से लैस कर दिया गया। लेकिन यही 'मजबूत दरवाजा' 2015 में एक दूसरी त्रासदी का कारण बन गया।
जर्मनविंग्स 9525 हादसा: बार्सिलोना से डसेलडोर्फ जा रहे एयरबस A320 के कैप्टन जब वॉशरूम गए, तो 27 वर्षीय सह-पायलट एंड्रियास लुबिट्ज (Andreas Lubitz) ने कॉकपिट को भीतर से लॉक कर दिया।
गंभीर डिप्रेशन और आत्महत्या: लुबिट्ज गंभीर डिप्रेशन और साइकोसिस से पीड़ित था। उसने जानबूझकर विमान को फ्रेंच आल्प्स (पहाड़ियों) की तरफ मोड़ दिया। बाहर से कैप्टन ने कुल्हाड़ी और भारी औजारों से दरवाजे को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन मजबूत बुलेटप्रूफ दरवाजा नहीं खुला।
परिणाम: विमान पहाड़ों से टकरा गया और सभी 150 यात्रियों व क्रू मेंबर्स की दर्दनाक मौत हो गई।
दो पायलट की अंदर रहने की मिली अनुमति
कैसे अस्तित्व में आया 'टू-पर्सन रूल'?
जर्मनविंग्स हादसे के महज तीन दिन बाद, 27 मार्च 2015 को यूरोपीय एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने नियम जारी किया कि कॉकपिट में हर समय कम से कम दो अधिकृत व्यक्ति मौजूद होने चाहिए।
नियम की कार्यप्रणाली: यदि एक पायलट किसी भी कारण (जैसे टॉयलेट जाने) के लिए कॉकपिट से बाहर निकलता है, तो उसके बाहर जाने से पहले एक केबिन क्रू मेंबर (एयर होस्टेस या फ्लाइट अटेंडेंट) कॉकपिट के अंदर प्रवेश करेगा। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी अकेला पायलट कॉकपिट का दरवाजा अंदर से बंद न कर सके।
नियमों में उतार-चढ़ाव और मई 2026 की नई गाइडलाइंस
2016 में ढील: 2016 में EASA ने बार-बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने को सुरक्षा के लिए नया जोखिम मानते हुए इस नियम को एयरलाइंस के अपने रिस्क असेसमेंट (जोखिम मूल्यांकन) पर छोड़ दिया था, जिसके बाद कई एयरलाइंस ने इसे हटा दिया था।मई 2026 की संशोधित गाइडलाइन: मई 2026 में EASA ने अपनी गाइडलाइंस को फिर से संशोधित करते हुए बड़े व्यावसायिक विमानों के कॉकपिट में दो व्यक्तियों की निरंतर उपस्थिति को अपना प्राथमिक और पसंदीदा मानक पुनः घोषित कर दिया है।
यह नियम न केवल किसी पायलट की गलत मंशा को रोकता है, बल्कि यदि कॉकपिट में मौजूद अकेला पायलट अचानक बेहोश या अस्वस्थ हो जाए, तो दूसरा क्रू मेंबर बाहर मौजूद पायलट को तुरंत अंदर दाखिल कराने में मदद कर सकता है।
