कोलकाता का प्रसिद्ध दुर्गा पूजाोत्सव इस बार एक भयानक और दिल दहला देने वाली त्रासदी के साए में आ गया है। सप्तमी की शाम (शनिवार, 17 अक्टूबर 2026) उत्तर कोलकाता के ऐतिहासिक चोरबगान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल (Chorbagan Sarbojanin Durgotsab) में मची भगदड़ ने उत्सव की खुशियों को मातम में बदल दिया। इस भीषण हादसे में 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। कैसे ये पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए मौत का जाल बन गया और कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अब तक क्या-क्या हुआ है, आखिर यह उत्सव सबसे बड़ा डेथ ट्रैप कैसे बना? कौन सी 5 वजहें सामने आ रही हैं, विस्तार से जानते हैं।
1-मूसलाधार बारिश से बिगड़े हालात
चोरबगान पंडाल (जो इस साल अपनी 91वीं वर्षगांठ मना रहा था और जिसे 'सेरर-सेरा' का दर्जा मिला था) में सप्तमी की शाम भारी भीड़ उमड़ी थी। शाम करीब 7:30 से 7:40 के बीच अचानक मूसलाधार बारिश और आंधी शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए बाहर खड़े सैकड़ों लोग तेजी से पंडाल के अंदर घुसने लगे। लगातार बारिश के कारण बाहर की सड़कें और रास्ते बेहद फिसलन भरे हो चुके थे। जब बाहर की भीड़ ने अंदर की तरफ धक्का दिया, तो अंदर पहले से मौजूद लोग बाहर निकलने को तैयार नहीं थे क्योंकि बाहर तेज बारिश हो रही थी।
2-रास्ता बेहद संकरा था
पंडाल के निकास द्वार के पास सीढ़ियां थीं और रास्ता बेहद संकरा था। अचानक भारी दबाव के कारण लोग सीढ़ियों से नीचे फिसल गए और देखते ही देखते लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे, जिससे एक के बाद एक कई जानें चली गईं। प्रत्यक्षदर्शियों और विशेषज्ञों ने इस हादसे के पीछे कई गंभीर व्यवस्थागत कमियों को जिम्मेदार ठहराया है। पंडाल के प्रवेश और निकास द्वार बहुत संकरे थे, जो इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए कतई पर्याप्त नहीं थे।
3-रोशनी की भारी कमी
चश्मदीदों के अनुसार, घटनास्थल और निकास मार्ग के आसपास पर्याप्त रोशनी नहीं थी, जिसके कारण लोग अंधेरे और अफरातफरी में संभल नहीं सके। शुरुआती जांच और बयानों के मुताबिक, पूजा कमेटी की ओर से एक लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा ने भीड़ को और अधिक उत्तेजित कर दिया, जिससे लोग बेकाबू होकर आगे दौड़ पड़े। इस भ्रम और अफरातफरी को संभालने के लिए कोई क्राउड कंट्रोल मैनेजर या एक्सपर्ट वहां मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि प्रशासन और आयोजकों द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे, और इतनी बड़ी भीड़ के लिए पुलिस बल नाकाफी साबित हुआ।
4-पुलिस और वालंटियर्स की भारी कमी
सप्तमी की शाम को जब चोरबगान पंडाल में पैर रखने की जगह नहीं थी, तब वहां सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी या प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि भारी भीड़ को दिशा दिखाने या उन्हें व्यवस्थित करने के लिए मौके पर न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग थी और न ही प्रशासन द्वारा तय किए गए सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन कराया गया।
5-क्षमता से अधिक भीड़
चोरबगान पंडाल इस साल अपनी थीम और भव्यता के कारण शहर के मुख्य आकर्षणों में से एक ('सेरर-सेरा') था। आयोजकों को इस बात का अंदाजा था कि भारी भीड़ आएगी, इसके बावजूद 'होड़ और मार्केटिंग' के चक्कर में सुरक्षा प्रोटोकॉल को ताक पर रख दिया गया। पंडाल की अपनी एक तय क्षमता (Capacity) होती है, लेकिन अंदर पैर रखने की जगह न होने के बावजूद लगातार लोगों को अंदर जाने दिया गया।
अब तक कुल मौतें और गिरफ्तारी
इस हादसे में 19 लोगों की जान जा चुकी है (जिनमें से 17 की मौत मौके पर ही हो गई थी)। घायलों को तुरंत कोलकाता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MCH) पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, 24 घायल खतरे से बाहर हैं, जबकि 1 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए पूजा कमेटी के सचिव राजकुमार सेवदा समेत 7 मुख्य लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें आयोजक, सुरक्षा एजेंसी के प्रतिनिधि और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के अधिकारी शामिल हैं। चौतरफा दबाव के बाद पूजा कमेटी के महासचिव और अन्य पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
मृतकों के परिजनों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजा
गिरिश पार्क पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं (जैसे 105, 110 और 3(5)) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा, इलाके में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिससे भारी भीड़ के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे और एक सरकारी नौकरी का ऐलान किया है। वहीं, घायलों को 5-5 लाख रुपये दिए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीएमएनआरएफ (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
राजनीतिक हलकों में भी भूचाल आया
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक हलकों में भी भूचाल आ गया है। जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने लचर पुलिस व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के नेताओं ने अपनी पूर्व निर्धारित राजनीतिक और उत्सव से जुड़ी रैलियों/कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। अमित शाह स्थिति का जायजा लेने और घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे हैं। वहीं, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने राज्य के कई अन्य बड़े थीम-आधारित पूजा पंडालों को भी अस्थायी रूप से बंद करने की सलाह दी है ताकि ऐसी पुनरावृत्ति रोकी जा सके। चोरबागान की यह त्रासदी एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि उत्सव की चकाचौंध और थीम की होड़ में आम जनता की सुरक्षा और बुनियादी सुरक्षा मानकों से किस हद तक समझौता किया जाता है।
क्या टाला जा सकता था हादसा?
इस पूरी त्रासदी से यह साफ है कि यदि समय रहते पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाता, संकरे रास्तों पर नियंत्रण के लिए वन-वे या बैरिकेडिंग की व्यवस्था होती, और भीड़ की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जाती, तो इस भयानक हादसे को टाला जा सकता था। इसी गंभीर लापरवाही के चलते पूजा कमेटी के सदस्यों और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े लोगों पर पुलिस ने कड़ी कानूनी कार्रवाई की है।