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PM मोदी के कनाडा दौरे से क्या बदल सकता है? ट्रेड डील से लेकर खालिस्तान मुद्दे तक, जानें भारत के लिए क्यों अहम है यह यात्रा

PM Modi Canada Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर 2026 को कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा का मकसद भारत-कनाडा के तनावपूर्ण रिश्तों को सुधारना और व्यापार, ऊर्जा, यूरेनियम, तकनीक व सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना है। दौरे में प्रस्तावित CEPA व्यापार समझौते और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी नजर रहेगी।

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पीएम नरेंद्र मोदी और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की फोटो। PTI

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PM Modi Canada Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर 2026 को कनाडा का दौरा करेंगे। भारत और कनाडा के बीच लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों का फोकस व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर है। इस दौरे के दौरान प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण एजेंडा हो सकता है।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देश 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या के बाद पैदा हुए कूटनीतिक तनाव से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और पीएम मोदी के बीच हालिया बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और ठोस नतीजों पर काम करने पर सहमति बनी है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की फाइल फोटो।

पीएम मोदी के कनाडा दौरे का पूरा एजेंडा क्या है?

भारत के ओटावा स्थित उच्चायोग ने 11-12 दिसंबर को मोदी के कनाडा दौरे की पुष्टि की है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मुताबिक, मोदी टोरंटो और ओटावा जा सकते हैं। दोनों देशों की बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर जोर है।

इस यात्रा का महत्व केवल उच्चस्तरीय मुलाकातों तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना, निवेश के नए अवसर तलाशना और पुराने विवादों के बावजूद सहयोग के रास्ते खोलना भी अहम उद्देश्य हैं।

भारत-कनाडा व्यापार समझौता

मोदी के दौरे का सबसे अहम पहलू भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA हो सकता है। दोनों देश 2026 के अंत तक इस समझौते पर बातचीत पूरी करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच कारोबारी अवसरों का विस्तार करना है।

कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिकी बाजार पर निर्भरता से आगे विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत उसके लिए एक बड़ा संभावित व्यापारिक साझेदार है। वहीं, भारत को कनाडा के बाजार में अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए नए अवसर मिल सकते हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, यह लक्ष्य समझौते के निष्कर्ष, बाजार तक पहुंच और कारोबारी परिस्थितियों जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

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भारत-कनाडा रिश्तों पर एक नजर। AI IMAGE

ऊर्जा और यूरेनियम सहयोग पर रहेगी नजर

ऊर्जा दोनों देशों के संबंधों का एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की आवश्यकता है, जबकि कनाडा ऊर्जा संसाधनों और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की क्षमता रखता है।

दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत में तेल, गैस, स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा से जुड़े अवसर अहम हो सकते हैं। कनाडा से यूरेनियम आपूर्ति भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के संदर्भ में दीर्घकालिक और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। हालिया रिपोर्टों में यूरेनियम सौदे का भी उल्लेख किया गया है। इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और कनाडा को भारत जैसे बड़े बाजार के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

निज्जर हत्याकांड के बाद बिगड़े रिश्ते सुधारने की चुनौती

भारत और कनाडा के संबंधों में सबसे बड़ा विवाद खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में हुई हत्या के बाद पैदा हुआ था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को खारिज किया था। इस विवाद ने दोनों देशों के राजनयिक संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

इसके बाद राजनयिक स्तर पर तनाव बढ़ा और दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी सामने आई। हालांकि, मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संबंध सुधारने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। कार्नी का भारत दौरा और दोनों सरकारों के बीच हालिया संपर्क इसी व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं।

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पीएम कार्नी का हालिया भारत दौरा बेहद सकारात्मक रहा।

खालिस्तान समर्थक गतिविधियां और सुरक्षा का मुद्दा

भारत लंबे समय से कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करता रहा है। नई दिल्ली की प्रमुख मांगों में भारत-विरोधी गतिविधियों और हिंसा की धमकियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शामिल रही है।

ऐसे में मोदी और कार्नी के बीच बातचीत में सुरक्षा सहयोग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय अहम विषय हो सकते हैं। हालांकि, यात्रा के दौरान किसी खास सुरक्षा समझौते या फैसले की आधिकारिक पुष्टि होने पर ही उसे अंतिम एजेंडे का हिस्सा माना जा सकेगा।

दोनों देशों के लिए चुनौती यह है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बातचीत आगे बढ़े और इसका असर व्यापार, निवेश तथा लोगों के बीच संबंधों पर कम से कम पड़े।

तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और निवेश क्यों अहम?

भारत और कनाडा के बीच तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी हैं। आधुनिक तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करना कई देशों की प्राथमिकता बन चुका है।

भारत के लिए कनाडा के संसाधन और अनुसंधान क्षमताएं उपयोगी हो सकती हैं, जबकि कनाडा को भारतीय बाजार, तकनीकी प्रतिभा और निवेश के अवसरों से फायदा मिल सकता है। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से कंपनियों को नई साझेदारियां विकसित करने का अवसर मिल सकता है।

भारतीय छात्रों और प्रवासियों के लिए क्या मायने?

कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। भारतीय छात्र भी लंबे समय से कनाडा के शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई के लिए जाते रहे हैं। इसलिए दोनों देशों के संबंधों में वीजा, आव्रजन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों की अहम भूमिका है।

अगर द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार होता है, तो इससे छात्रों, पेशेवरों, कारोबारियों और परिवारों के बीच संपर्क बढ़ाने के रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, वीजा नियमों या आव्रजन नीतियों में किसी बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा के बिना किसी निश्चित राहत का दावा करना जल्दबाजी होगी।

पीएम मोदी का दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का अवसर है। इसके नतीजों का आकलन केवल मुलाकातों या संयुक्त बयानों से नहीं, बल्कि व्यापार समझौते पर प्रगति, ऊर्जा और तकनीक में ठोस सहयोग तथा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बातचीत से किया जाएगा।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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