दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के बेटे और पश्चिमी दिल्ली से सांसद रहे प्रवेश साहिब सिंह वर्मा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं, जो अपनी आक्रामक शैली और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। राजनीति में अपनी तीखी बयानबाजी और विवादों के कारण वे कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और विवादों का केंद्र बने हैं। ऐसा लगता है जैसे उनका और विवादों का चोलीदामन साथ है। एक बार फिर वह विवादों के केंद्र में हैं और विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। आखिर क्या है मामला, क्यों प्रवेश वर्मा फिर निशाने पर आए हैं, और किन-किन विवादों में उनका नाम आया है, विस्तार से जानते हैं।
विवादों में क्यों रहते हैं परवेश वर्मा?
थप्पड़कांड पर क्यों घिरे प्रवेश वर्मा?
पश्चिम दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें प्रवेश वर्मा एक युवक को थप्पड़ मारते और मोबाइल छीनते हुए दिखाई दे रहे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के स्थानीय विधायक जरनैल सिंह ने आरोप लगाया कि नई बनी सड़क बेहद खराब गुणवत्ता की थी, जिसे उन्होंने हाथ से ही उखाड़कर दिखाया। जब उनके साथी (साहब सिंह) इस गुणवत्ता जांच का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे, तो मंत्री आपा खो बैठे और उन्होंने युवक को थप्पड़ जड़ दिया।
विपक्ष का प्रवेश पर हमला
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, आतिशी, सौरभ भारद्वाज और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं ने इसे सड़क छाप गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार छिपाने की बौखलाहट करार देते हुए प्रवेश वर्मा की गिरफ्तारी की मांग की है। पीड़ित युवक ने पुलिस में जान से मारने की धमकी और मारपीट की शिकायत भी दर्ज कराई है।
प्रवेश वर्मा की सफाई
प्रवेश वर्मा ने वीडियो जारी कर सफाई दी कि अधूरा वीडियो दिखाकर सच छिपाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप विधायक जरनैल सिंह सड़क ठेकेदार से कमीशन मांग रहे थे और जब काम हुआ तो अपने कार्यकर्ताओं को बुलाकर हंगामा करवाया। वर्मा के मुताबिक, युवक उनके और उनके परिवार के लिए भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा था, जिसके जवाब में उन्होंने गुस्से में आकर यह कदम उठाया।
विवादों से प्रवेश वर्मा का पुराना नाता
प्रवेश वर्मा के राजनीतिक करियर में यह पहला मौका नहीं है जब वे अपने आचरण या बयानों को लेकर बड़े विवाद में फंसे हों। इससे पहले भी वे कई मौकों पर सुर्खियों में रहे हैं।
शाहीन बाग प्रदर्शन पर विवादित बयान (2020)
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान सीएए (CAA) के विरोध में चल रहे शाहीन बाग प्रदर्शन पर उनका बयान सबसे बड़े विवादों में से एक बना था। उन्होंने कहा था, "शाहीन बाग में लाखों लोग इकट्ठे होते हैं... वे आपके घरों में घुसेंगे, आपकी बहनों-बेटियों का बलात्कार करेंगे और उन्हें मार डालेंगे।" तब चुनाव आयोग (EC) ने उनके इस बयान पर सख्त कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें 24 घंटे के लिए चुनाव प्रचार करने से प्रतिबंधित कर दिया था।
मस्जिदों और मदरसों के सर्वेक्षण की मांग
उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिखकर दावा किया था कि सरकारी जमीनों, पार्कों और सड़कों पर 50 से अधिक मस्जिदें और कब्रिस्तान अवैध रूप से बनाए गए हैं। उन्होंने इनका सर्वे कराने की मांग की थी, जिस पर काफी राजनीतिक घमासान हुआ था।
सामूहिक बहिष्कार की अपील (2022)
अक्टूबर 2022 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में आयोजित 'विश्व हिंदू परिषद' की एक महापंचायत में उन्होंने एक विशेष समुदाय का नाम लिए बिना उनका पूर्ण बहिष्कार करने का आह्वान किया था। उन्होंने मंच से कहा था, "इनका दिमाग ठीक करने के लिए एक ही इलाज है - पूर्ण बहिष्कार। आप इनकी दुकानों से सामान मत खरीदो, इन्हें मजदूरी मत दो।" इस बयान के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठी थी।
केजरीवाल को 'आतंकवादी' बताया (2020)
दिल्ली चुनावों के दौरान ही प्रवेश वर्मा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए उन्हें आतंकवादी कह दिया था। इस टिप्पणी के कारण भी चुनाव आयोग ने उन्हें दोबारा स्टार प्रचारकों की सूची से हटाकर प्रचार पर रोक लगाई थी।
छठ पूजा पर DJB अधिकारी से तीखी बहस (2022)
छठ पूजा के दौरान कालिंदी कुंज घाट पर यमुना के जहरीले झाग को साफ करने के लिए कैमिकल छिड़क रहे दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अधिकारी पर प्रवेश वर्मा बुरी तरह भड़क गए थे। उन्होंने अधिकारी को डांटते हुए कहा था, "तुम इस केमिकल को अपने सिर पर डालो... आठ साल में तुम यमुना साफ नहीं कर पाए और अब लोगों को मार रहे हो।" इस पूरी घटना का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद नौकरशाहों ने इसका कड़ा विरोध जताया था।
आक्रामक अंदाज में सियासत का नतीजा
कुल मिलाकर प्रवेश वर्मा का राजनीतिक करियर हमेशा से ही उनके सख्त और आक्रामक अंदाज के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। जहां उनके समर्थक इसे उनकी बेबाकी और तेज एक्शन के रूप में देखते हैं, वहीं विरोधी इसे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक मर्यादा का उल्लंघन मानते हैं। प्रवेश वर्मा आक्रामक अंदाज में सियासत करते हैं और अपने बयानों को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ जाते हैं। यही वजह है कि वह एक बार फिर अपने कृत्य को लेकर सियासी दलों के निशाने पर हैं।
