न इंजीनियरिंग की डिग्री, न जेब में पैसा, उत्तराखंड के युवक ने कैसे बना दी उड़ने वाली कार?

अल्मोड़ा के रवि टम्टा की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है। उनके पास न तो कोई इंजीनियरिंग की बड़ी डिग्री थी और न ही कोई हाई-टेक लैब या भारी-भरकम बजट। उनके पास था तो सिर्फ कुछ अलग करने का जुनून।

बड़ी-बड़ी डिग्रियां, महंगे कॉलेज और नामी तकनीकी संस्थान... किसी भी नए आविष्कार या टेक्नोलॉजी को गढ़ने के लिए अमूमन यही पैमाना माना जाता है। लेकिन उत्तराखंड के एक साधारण युवक ने इन तमाम पारंपरिक धारणाओं को दरकिनार करते हुए वह कर दिखाया है, जो अच्छे-अच्छे इंजीनियरों के लिए भी एक मिसाल है। बिना किसी औपचारिक इंजीनियरिंग डिग्री के, सिर्फ अपने बुलंद हौसले, अटूट लगन और 13 साल के लंबे संघर्ष के दम पर रवि टम्टा (Ravi Tamta) ने 'इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार' (Electric Flying Car) यानी उड़ने वाली कार का मॉडल तैयार कर दिखाया है।

flying car

युवक ने कैसे बना दी Flying Car ?

बिना डिग्री के तकनीकी महारत

अल्मोड़ा के रवि टम्टा की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है। उनके पास न तो कोई इंजीनियरिंग की बड़ी डिग्री थी और न ही कोई हाई-टेक लैब या भारी-भरकम बजट। उनके पास था तो सिर्फ कुछ अलग करने का जुनून। रवि ने इस प्रोजेक्ट पर रातों-रात काम नहीं किया। इसके पीछे उनकी 13 साल की लंबी रिसर्च, तकनीकी अध्ययन, असफलताएं और लगातार सुधार की प्रक्रिया शामिल है। एयरोडाइनेमिक्स, इलेक्ट्रिकल सर्किट, मोटर्स और मैकेनिज्म की जटिलताओं को उन्होंने खुद किताबों, इंटरनेट और प्रयोगों के जरिए समझा।

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