ईरान संग दोस्ती या सऊदी अरब का साथ, हूती हमलों से क्यों फूल रहे पाकिस्तान के हाथ-पांव?

पाकिस्तान इस क्षेत्र में केवल एक मूकदर्शक नहीं है, बल्कि वह सऊदी अरब का सबसे करीबी सैन्य व सुरक्षा साझेदार भी है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश भी कर रहा है। अब हूती हमलों के कारण पाकिस्तान की ये दोनों भूमिकाएं आपस में टकराती नजर आ रही हैं।

Pakistan News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के बीच मध्य पूर्व में युद्ध का एक और मोर्चा खुल गया है। यह मोर्चा यमन के हूती विद्रोहियों ने खोला है। सऊदी अरब में हूती हमलों ने पाकिस्तान के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। हूतियों के हमलों की आंच पाकिस्तान में महसूस की जा रही है। पाकिस्तान के हुक्मरानों को डर सता रहा है कि हूतियों ने यदि आगे सऊदी अरब पर हमले किए तो न चाहते हुए उसे भी युद्ध में सऊदी अरब का साथ देना पड़ेगा। इससे वह क्षेत्रीय जंग की चपेट में आ सकता है। हूतियों पर पाकिस्तानी कार्रवाई पर ईरान भी भड़क सकता है।

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हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में किए हैं हमले। तस्वीर-AI

सऊदी अरब-पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता

दरअसल, पाकिस्तान इस क्षेत्र में केवल एक मूकदर्शक नहीं है, बल्कि वह सऊदी अरब का सबसे करीबी सैन्य व सुरक्षा साझेदार भी है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश भी कर रहा है। अब हूती हमलों के कारण पाकिस्तान की ये दोनों भूमिकाएं आपस में टकराती नजर आ रही हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल ही एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत पाकिस्तान के हजारों सैनिक और फाइटर जेट सऊदी अरब में तैनात हैं। ऐसे में अगर सऊदी अरब पर लगातार हमले होते हैं, तो पाकिस्तान किनारे बैठकर तमाशा नहीं देख सकता।

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