Himachal Politics: हिमाचल प्रदेश की सियासत किस ओर करवट ले रही है, फिलहाल ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में भाजपा को सभी 4 सीटों पर जीत हासिल हुई, तो अब तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में एक पर बीजेपी तो दो पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। चुनावी नतीजों से ये समझा जा सकता है कि सूबे की सुक्खू सरकार के लिए कोई टेंशन की बात नहीं है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को एकसाथ दो-दो खुशखबरी मिली। एक तरफ जहां कांग्रेस ने तीन में से दो सीटों पर जीत दर्ज करके उनकी सरकार को और मजबूत और सुरक्षित किया, तो वहीं अब विधानसभा में उनके साथ उनकी पत्नी भी नजर आएंगी।
देहरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पहली बार खोला खाता।
पति-पत्नी एकसाथ विधानसभा में आएंगे नजर
सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की उस सीट पर जीत हासिल की, जहां अब तक कांग्रेस ने कभी चुनाव नहीं जीता था। देहरा विधानसभा सीट के लिए हुए विधानसभा उपचुनाव में सीएम की पत्नी ने न सिर्फ चुनाव जीता, बल्कि इस सीट से कांग्रेस के कभी न जीत पाने के रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया। इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार होशियार सिंह के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी चुनाव प्रचार किया था।
इस सीट पर पहली बार कांग्रेस ने हासिल की जीत
हिमाचल प्रदेश के देहरा से अब तक कांग्रेस कभी भी चुनाव नहीं जीत पाई थी। यानी कमलेश ठाकुर की जीत के साथ देहरा में कांग्रेस का पहली बार खाता खुला है। साल 2012 में यह सीट अस्तित्व में आई थी, इसके बाद तीन चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस बार सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर पर सबकी नजरें थीं और आखिरकार उन्होंने जीत हासिल कर पहली बार देहरा में कांग्रेस का डंका बजाया।
देहरा विधानसभा उपचुनाव के नतीजे देखिए
हिमाचल प्रदेश की देहरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी एवं कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश ठाकुर ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी होशियार सिंह को 9,399 मतों के अंतर से शिकस्त दी। कांग्रेस पार्टी ने पहली बार देहरा विधानसभा सीट से जीत हासिल की है। देहरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में ठाकुर को 32,737 मत मिले, जबकि सिंह को 23,338 मत प्राप्त हुए। वहीं, इस सीट पर तीनों निर्दलीय उम्मीदवारों में से कोई भी 200 वोट हासिल नहीं कर पाए। देहरा विधानसभा सीट पर 10 जुलाई को हुए मतदान में 86,520 मतदाताओं में से 65.42 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
होशियार सिंह ने दो बार निदर्लीय चुनाव जीता
यह निर्वाचन क्षेत्र 2012 में किए गए परिसीमन के बाद बना था। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री रवि इंदर सिंह 2012 में इस सीट से चुने गए थे। होशियार सिंह ने 2017 और 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर देहरा सीट से जीत हासिल की थी। हिमाचल प्रदेश में फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय विधायक होशियार सिंह ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था और बाद में वह अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए, इसलिए पार्टी ने उन्हें देहरा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था।
क्या कहता है देहरा सीट का चुनावी इतिहास
| वर्ष | विजेता | पार्टी |
| 2012 | रविंदर सिंह रवि | भाजपा |
| 2017 | होशियार सिंह | निर्दलीय |
| 2022 | होशियार सिंह | निर्दलीय |
| 2024 (उपचुनाव) | कमलेश ठाकुर | कांग्रेस |
सीएम की पत्नी ने किया था ये बड़ा दावा
कमलेश ठाकुर ने चुनाव-प्रचार के दौरान कहा था कि देहरा का काम करवाने के लिए उन्हें सचिवालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा था, 'मैं घर पर ही मुख्यमंत्री से काम करवा लूंगी।' देहरा सीट पर अंतिम परिणाम जारी होने से पहले ही शिमला स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर जश्न मनाया गया तथा समर्थकों ने पटाखे फोड़े।
इन तीनों विधानसभा सीट पर क्यों हुए उपचुनाव?
हिमाचल प्रदेश के नालागढ़, हमीरपुर और देहरा विधानसभा सीट पर सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई। तीनों सीट पर 10 जुलाई को वोट डाले गए थे। ये सीट तीन निर्दलीय विधायकों- होशियार सिंह (देहरा), आशीष शर्मा (हमीरपुर) और के. एल. ठाकुर (नालागढ़) के 22 मार्च को सदन की सदस्यता से इस्तीफा देने के कारण खाली हुई थीं। इन विधायकों ने 27 फरवरी को हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। बाद में, ये भाजपा में शामिल हो गए थे।
हिमाचल की तीनों सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे
तीनों सीटों के चुनावी नतीजों की बात की जाए तो देहरा के अलावा नालागढ़ से भाजपा उम्मीदवार के. एल. ठाकुर को हार झेलनी पड़ी, यहां कांग्रेस के हरदीप सिंह बाजवा ने उपचुनाव में जीत हासिल की और ठाकुर को 8990 वोटों से शिकस्त दी। वहीं हमीरपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के आशीष शर्मा ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के पुष्पेंद्र वर्मा को महज 1571 वोटों से चुनाव हराया।
विधानसभा अध्यक्ष ने तीन जून को इन विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे, जिसके बाद तीनों सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था, जिसके कारण उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी। भाजपा ने तीनों निर्दलीय विधायकों को उनके निवार्चन क्षेत्रों से ही उम्मीदवार बनाया था।
