Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव के लिए 75 दिन का मैराथन अभियान अब थम चुका है। सातवें चरण के मतदान के लिए हुए आखिरी प्रचार में पार्टियों ने जमकर ताकत झोंकी और गुरुवार शाम चुनाव प्रचार पर पूरी तरह ब्रेक लग गया। अब 1 जून को इस चरण के मतदान होंगे और इसके बाद इंतजार होगा मतगणना वाले दिन यानी 4 जून का। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद से 75 दिन के इस तूफानी चुनाव प्रचार में सभी पार्टियों ने पूरी ताकत झोंकी। बड़ी-बड़ी रैलियां, चुनावी जनसभाएं और रोडशो के जरिए मतदाताओं के मन में उतरने की पुरजोर कोशिश हुई। एनडीए की तरफ से चुनाव अभियान को जहां पीएम मोदी ने लीड किया तो इंडिया गठबंधन की तरफ से मुख्य चेहरा कांग्रेस नेता राहुल गांधी रहे।
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बता दें, चुनाव आयोग की ओर से 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की घोषणा की गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी आचार संहिता लागू होने से पहले ही देश के कई राज्यों का तूफानी दौरा कर रहे थे। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ देश के दक्षिण छोर से शुरू हुआ उनका प्रचार अभियान उत्तर में स्थित पंजाब के होशियारपुर में आकर समाप्त हुआ। 75 दिन की इस अवधि में पीएम मोदी ने 180 रैलियां और रोड शो किए हैं। पीएम मोदी की रैलियों के साथ उनके रोड शो और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने का आंकड़ा देखें तो यह संख्या 206 है। इसके साथ ही उन्होंने इस दौरान 80 से ज्यादा मीडिया चैनलों, अखबारों, यूट्यूबरों, ऑनलाइन मीडिया माध्यमों को अपना साक्षात्कार दिया।
विपक्ष को अकेले टक्कर देते रहे पीएम मोदी
लोकसभा चुनाव में विपक्ष के इंडिया गठबंधन की तरफ से फायर ब्रांड नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल ने भी जमकर चुनाव प्रचार किया, लेकिन पीएम मोदी की जनसभाओं और रोडशो को देखें तो वह पूरे विपक्ष को अकेले ही टक्कर देते नजर आए। औसतन हर दिन पीएम मोदी ने दो से ज्यादा रैलियां और रोड शो के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं, पीएम मोदी मार्च में चुनाव की घोषणा से पहले फरवरी और मार्च की 15 तारीख तक 15 रैलियां कर चुके थे। पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा 22 जनसभाएं और कुल 31 चुनावी कार्यक्रम यूपी में किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक में 11, तेलंगाना में 11, तमिलनाडु में 7, आंध्र प्रदेश में 5 और केरल में 3 रैलियां की हैं। पीएम मोदी ने बिहार में 20 चुनावी कार्यक्रम और महाराष्ट्र में 19 चुनावी कार्यक्रम के साथ पश्चिम बंगाल में 20 रैलियों को संबोधित किया। इसके साथ ही पीएम ने ओडिशा और मध्य प्रदेश में 10 चुनावी कार्यक्रम किए। वहीं, पीएम का फोकस झारखंड पर भी रहा, जहां उन्होंने 7 कार्यक्रम किए।
बीजेपी व एनडीए की तरफ से चुनावी रैलियां-
| नेता | चुनावी रैली, जनसभा, इंटरव्यू, रोडशो |
| नरेंद्र मोदी | 206 |
| अमित शाह | 188 |
| जेपी नड्डा | 134 |
| राजनाथ सिंह | 101 |
इंडिया गठबंधन की तरफ से चुनावी रैलियां-
| नेता | चुनावी रैली, जनसभा, इंटरव्यू, रोडशो |
| राहुल गांधी | 107 |
| अखिलेश यादव | 73 |
| ममता बनर्जी | 61 |
| मल्लिकार्जुन खड़गे | 100+ |
| प्रियंका गांधी | 108 |
| तेजस्वी यादव | 251 |
दो नारों के बीच उलझा रहा चुनाव
चुनाव कोई भी हो, उसमें एजेंडा सेट करने का काम चुनावी नारे ही करते हैं। ये नारे ही होते हैं जो मतदाताओं के मूड को बदलने के लिए सबसे बड़ा चुनावी हथियार होते हैं। फिर चाहें 2014 का लोकसभा चुनाव हो या 2019 का या फिर 2024 का। 2014 में 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसे नारे ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत दिलाने में काफी योगदान दिया था, तो 2019 में 'मैं भी चौकीदार' कैंपेन से बीजेपी ने दोबारा सत्ता हासिल की थी। वहीं, 2024 की बात करें तो 'अबकी बार 400 पार' और 'फिर एक बार मोदी सरकार' नारों ने मतदाताओं का ध्यान अपनी तरफ खूब आकर्षित किया। वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस का 'हाथ बदलेगा हालात' और 'न्याय योजना' लोगों की जुबान पर छाया रहा।
