वाराणसी। देश के शिक्षण संस्थाओं को नशा मुक्त करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने नई पहल की है। कैंपस में दाखिले के पहले अब छात्रों का डोप टेस्ट होगा, ताकि ये पता लग सके कि छात्र कहीं नशे का आदी तो नहीं है। इसकी शुरुआत IIT BHU से होने जा रही है। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक IIT BHU में एडमिशन लेने वाले हर नए छात्र को यूनियन आधारित ड्रग टेस्ट से गुजरना होगा। इसके मद्देनजर IIT BHU ने इसके लिए 9 सदस्यों की एक कमेटी भी बना दी है।
कैम्पस को नशा मुक्त बनाना उद्देश्य
IIT BHU में हर साल 1520 छात्र बीटेक में एडमिशन लेते हैं। जबकि 700 छात्र एमटेक, पीएचडी में दाखिला लेते हैं। ऐसे में इस बार दाखिले की प्रक्रिया में एक नया बदलाव देखने को मिलेगा। एडमिशन लेने वाले छात्रों को यूरिन बेस्ड ड्रग टेस्ट देना होगा। ये आदेश UGC के Vision Document on Narcotics Control 2026-2029 का हिस्सा है। इसके तहत UGC ने सभी Centrally Funded Institutes यानी IIT, IIM और Central University को कैंपस को ड्रग फ्री बनाने का आदेश दिया है।
क्या है UGC की गाइडलाइन
अब सवाल ये है कि क्या कोई छात्र डोप टेस्ट ने फेल हो जाता है तो उसका एडमिशन कैंसिल हो जाएगा ? तो ऐसा नहीं है। नई गाइडलाइन के मुताबिक ये टेस्ट पूरी तरह Voluntary होगा, यानी छात्र की लिखित सहमति जरूरी होगा। टेस्ट में 6 तरह के ड्रग्स की जांच होगी - जिसमें गांजा, कोकीन, हीरोइन, अफीम जैसे नशे शामिल हैं। रिपोर्ट NABL सर्टिफाइड लैब की ही मान्य होगी और 7 दिन से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए।
डोप टेस्ट फेल होने पर नहीं होगी कार्रवाई
UGC की गाइडलाइन साफ कहती है कि ये सजा के लिए नहीं, सुधार के लिए है। पॉजिटिव मिलने पर छात्र को काउंसलिंग, मेडिकल हेल्प और नशा मुक्ति केंद्र की मदद दी जाएगी और उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।इस पूरी प्रक्रिया को देखने के लिए IIT BHU ने डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर राजेश कुमार की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसमें BHU के डॉक्टर भी शामिल हैं।
छात्रों ने किया गाइडलाइन का स्वागत
UGC की इस नई गाइड लाइन का IIT के छात्रों ने भी स्वागत किया है। छात्रों का कहना है कि कई बार नए छात्र संगत और गलत आदतों के कारण नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं।
