JNU PG प्रवेश प्रक्रिया पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक, 'डिप्रीवेशन पॉइंट्स' को लेकर उठाए गंभीर सवाल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम अंतरिम आदेश जारी किया है. हाई कोर्ट ने जेएनयू को 'डिप्रीवेशन पॉइंट्स' (वंचित वर्ग के अंकों) के आधार पर दाखिले को अंतिम रूप देने से रोक दिया है।

JNU PG Admission 2026: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में एडमिशन की प्रक्रिया को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने जेएनयू को 'डिप्रीवेशन पॉइंट्स' (वंचित वर्ग के अंकों) के आधार पर दाखिले को अंतिम रूप देने से रोक दिया है। यह मामला प्रॉस्पेक्टस के सेक्शन-V के तहत मिलने वाले उन अंकों से जुड़ा है, जिन्हें विश्वविद्यालय द्वारा पिछले शिक्षण संस्थानों के भौगोलिक आधार (पिछड़े या वंचित क्षेत्रों) पर छात्रों को प्रदान किया जाता है। छात्र अमित मेहरा द्वारा इस नीति को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।

जेएनयू पीजी एडमिशन 2026

जेएनयू पीजी एडमिशन 2026

क्या है नीति

जेएनयू के मौजूदा नियमों के अनुसार, छात्रों को अधिकतम 12 'डिप्रीवेशन पॉइंट्स' दिए जाते हैं। इसमें प्रत्येक एक पॉइंट को 3 अंकों के बराबर माना जाता है, जिसका मतलब है कि एक छात्र को इसके जरिए कुल 36 तक अतिरिक्त अंक मिल सकते हैं। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सीयूईटी की प्रवेश परीक्षा में छात्रों द्वारा हासिल किए गए अंकों में विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार बदलाव करना और अतिरिक्त अंक जोड़ना पूरी चयन प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

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