Career In Computer Science, How to become Computer Scientist: टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने वाले ज्यादातर छात्रों की पहली पसंद कंप्यूटर साइंस बनी हुई है। आज का दौर टेक्नोलॉजी के साथ साथ डिजिटल का युग है। इसमें कंप्यूटर साइंस्टिट की बेहद अहम भूमिका है। करियर के लिए कंप्यूटर साइंस का काफी बेहतर माना जाता है। युवा कंप्यूटर साइंटिस्ट बन लाखों की सैलरी हासिल कर सकते हैं। ज्यादातर लोग कंप्यूटर साइंस और कंप्यूटर इंजीनियरिंग को एक ही मानते हैं, हालांकि यह दोनों ही एक दूसरे से भिन्न हैं। कंप्यूटर साइंस में कंप्यूटर प्रोसेस व डेटा का अध्ययन किया जाता है। इसमें उन सभी प्रक्रियाओं की स्टडी की जाती है जो डेटा से संबंधित होते हैं। इस क्षेत्र में भी चार मुख्य क्षेत्र होते हैं- कंप्यूटर प्रिंसिपल, साइंटिफिक कंप्यूटिंग, हार्डवेयर सिस्टम, सॉफ्टवेयर सिस्टम। वहीं कंप्यूटर इंजीनियरिंग में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डेवलप का कार्य होता है।
Career In Computer Science
Job Options in Computer Science
1. वेब डेवलपर
कोर्स के बाद ज्यादातर छात्र वेब डेवलपर बनना पसंद करते हैं। एक वेब डेवलपर का कार्य वेबसाइट की कोडिंग, लेआउट और डिजाइन तैयार करना होता है। ये आवश्यकतानुसार वेबसाइटों को मेंटेन और स्केल भी करते रहते हैं।
2. एप्लीकेशन डेवलपर
एप्लिकेशन डेवलपर्स का कार्य सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन डेवलप करना है। ये किसी भी एप्लिकेशन को अपडेट और मॉडिफाई करते हैं। किसी भी कंपनी के साथ जुड़कर इनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन विकसित करना शामिल है।
3. डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर
डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर का जॉब काफी टफ माना जाता है। इनका कार्य कंपनी को डेटा उपलब्ध करना और उसे करप्ट या हानि से सुरक्षित बनाना है। उनके प्राइमरी ड्यूटी में डेटाबेस का मैनेजमेंट करना, बैकअप को डिजाइन करना और इंप्लीमेंट करना शामिल है।
4. कंप्यूटर साइंटिस्ट
कंप्यूटर साइंटिस्ट इस फील्ड का मूल है। इनका कार्य नई तकनीकों का इजाद करना और उसका साइंस या बिजनेस में वास्तविक समस्याओं पर लागू करना है। इनका मुख्य कार्य एल्गोरिदम डेवलप करना और उसे उपयोग के लिए आसान बनाना है।
Computer Science Course
कंप्यूटर साइंस में छात्रों के लिए डिग्री और डिप्लोमा के कई कोर्स उपलब्ध हैं। जिन्हें छात्र 12वीं के बाद कर सकते हैं। इन कोर्स में छात्र कंप्यूटिंग विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला के बारे में सीखते हैं। ग्रेजुएशन लेवल पर छात्रों को कंप्यूटिंग के सिद्धांत और सॉफ्टवेयर सिस्टम डिजाइन करने की प्रैक्टिस के बारे में सिखाया जाता है। वहीं डिप्लोमा के कोर्स में छात्रों को प्रोग्रामिंग, कंप्यूटर फंडामेंटल्स एंड प्रोग्रामिंग, कंप्यूटर एप्लिकेशन, पीसी - सॉफ्टवेयर, स्ट्रक्चर्ड सिस्टम एनालिसिस एंड डिजाइन, ऑपरेटिंग सिस्टम और प्रोग्रामिंग इन विजुअल जैसे बेसिक विषयों की जानकारी दी जाती है।
