देश के कई शहरों में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी 11वीं और 12वीं कक्षा में स्कूल में दाखिला तो लेते हैं, लेकिन नियमित कक्षाओं में उपस्थित होने के बजाय कोचिंग संस्थानों में समय बिताते हैं। ऐसी व्यवस्था को आम तौर पर ‘डमी स्कूल’ कहा जाता है। इसमें विद्यार्थी स्कूल के रिकॉर्ड में नामांकित रहते हैं, लेकिन उनकी नियमित उपस्थिति नहीं होती लेकिन अब NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्कूलों से दूरी बनाने वाले विद्यार्थियों और डमी एडमिशन की व्यवस्था पर अब निगरानी बढ़ सकती है।
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध स्कूलों में औचक निरीक्षण कराने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित हो रहे हैं या नहीं और बोर्ड परीक्षा के लिए निर्धारित उपस्थिति संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
CBSE के नियम क्या कहते हैं?
CBSE ने आयोग के समक्ष अपने संबद्धता उपनियमों का हवाला देते हुए बताया कि नियमित रूप से स्कूल नहीं आने वाले या निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति की शर्त पूरी नहीं करने वाले विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थी केवल परीक्षा में बैठने के लिए स्कूल में नामांकन न कराएं, बल्कि नियमित पढ़ाई और कक्षा गतिविधियों में भी हिस्सा लें।
CIC को मिली थी शिकायत
CIC के सामने भी एक शिकायत आई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुछ स्कूल नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं होने वाले विद्यार्थियों को भी प्रमाणपत्र और परीक्षा परिणाम उपलब्ध करा रहे हैं। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए CBSE को औचक निरीक्षण करने की सिफारिश की है। हालांकि, यह सिफारिश अपने आप में किसी खास स्कूल के खिलाफ आरोपों को साबित नहीं करती।
