Delhi News: शानिवार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद जंतर-मंतर पर फिर पथराव शुरू हो गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का लाठीचार्ज किया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह के कथित तौर पर हिंसक होने और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव करने के बाद यह झड़प शुरू हुई। सूत्रों का कहना है कि कि दो पुलिसकर्मियों के सिर में चोटें आईं और उन्हें तुरंत पास एक अस्पताल ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और इलाके में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात है।
प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर पथराव, दो पुलिसकर्मी घायल
"हम लोगों से शांत रहने और शांति से जाने का अनुरोध करते हैं"
वहीं स्पेशल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (कानून-व्यवस्था, जोन-I) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा, "हम अभी लोगों के हटने पर नजर रख रहे हैं। लोग पहले ही हटने लगे हैं। हम लोगों से शांत रहने और शांति से जाने का अनुरोध करते हैं। हम सभी से कानून और व्यवस्था की कोई दिक्कत न पैदा करने का भी अनुरोध करते हैं। हम उनकी मदद करने के लिए यहां हैं, और हम सभी से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं।"
दिल्ली पुलिस की एफआईआर में हत्या के प्रयास समेत 13 आरोप शामिल
वहीं CJP की 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान कर्तव्य पथ के पास हुई हिंसा के मामले में दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास समेत 13 आरोप शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि सुरक्षा अवरोधकों को तोड़ने की कोशिश करते समय प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर जान से मारने के इरादे से हमला किया। एक पुलिस निरीक्षक की शिकायत पर कर्तव्य पथ थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने संसद के आस-पास के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में घुसने से रोकने के लिए लगाए गए पुलिस अवरोधकों को तोड़ने की कोशिश की। प्राथमिकी में, संसद की ओर मार्च के दौरान रफी मार्ग पर हुई झड़पों के बारे में पुलिस का पक्ष बताया गया है।
पुलिस की गाड़ियों समेत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब प्रदर्शनकारियों को रोका गया, तो उन्होंने पुलिसकर्मियों पर कथित रूप से पत्थर, चप्पल और दूसरी चीजे फेंकीं तथा उनके साथ मारपीट की, जिससे कई अधिकारी घायल हो गए। एफआईआर में, प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के दौरान पुलिस की गाड़ियों सहित सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया।
200 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, झड़पों में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए। हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन वीडियो और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। साथ ही प्राथमिकी में, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 13 धाराएं लगाई गयी हैं, जिनमें धारा 109(1) (हत्या की कोशिश) के अलावा दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, सरकारी अधिकारियों के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य अपराधों से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
