Shiva Sharma Shraddha Dubey Case: शिवा शर्मा मौत मामले में फरार चल रही आरोपी श्रद्धा दुबे पहली बार मीडिया के सामने आई और खुद को निर्दोष बताया। श्रद्धा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। श्रद्धा दुबे ने कहा, "सभी आरोप बेबुनियाद हैं। सिर्फ किसी के कह देने से हम हत्यारे नहीं हो जाते। यह सुसाइड था, मैंने उसे अपनी बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदते हुए देखा था। अगर मेरी बिल्डिंग की सीसीटीवी फुटेज निकाली जाए तो मेरी बेगुनाही साबित हो जाएगी, लेकिन किसी वजह से वह फुटेज अभी तक नहीं निकाली गई है। नेपाल बॉर्डर तक की फुटेज निकाली गई है तो मेरी बिल्डिंग की फुटेज निकालने में क्या दिक्कत है?"
शिवा शर्मा केस में फरार श्रद्धा दुबे का पहला बयान
श्रद्धा ने आगे कहा, "मैं इस व्यक्ति को सिर्फ चार महीने से जानती हूं, उसमें से दो से ढाई महीने हम दोस्त थे। वह कभी मेरे घर नहीं आया। पिछले दो महीनों में ही आना शुरू हुआ था और इतने कम समय में ऐसा कुछ नहीं हो सकता कि हम एक-दूसरे के लिए ऐसा सोचें। उनकी मां ने झूठे आरोप लगाए हैं क्योंकि वह मुझे कभी पसंद नहीं करती थीं।"
श्रद्धा ने अपनी बहन का नाम घसीटे जाने पर कहा, "ऐसी कोई डायरी नहीं है, ऐसा कुछ भी नहीं है। मेरी बहन मुझसे मिलने आई थी, उसका कोई कनेक्शन नहीं है, उसे जबरदस्ती घसीटा जा रहा है। मैं वहां से इसलिए गई थी क्योंकि मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। मेरी न्यायपालिका से अपील है कि बस निष्पक्ष जांच कराई जाए।" बता दें कि इस मामले में इंस्पेक्टर हजरतगंज लाइन हाजिर हो गए हैं।
ड्राइवर का बयान भी आया सामने
इस मामले में श्रद्धा दुबे की स्कॉर्पियो चलाने वाले ड्राइवर ने भी बयान दिया है। ड्राइवर ने कहा, "कंपनी ने मुझे कुछ दिनों के लिए काम पर रखा था। फरवरी महीने में मैंने करीब एक हफ्ते से 10 दिनों तक उनकी गाड़ी चलाई थी। मुझे पेमेंट वह खुद नहीं करती थीं, बल्कि आमिर मुझे लाकर पैसे देता था। हालांकि, आमिर भी किसी दूसरे व्यक्ति से पैसे लेकर मुझे देता था। अब उस व्यक्ति का नाम क्या था, यह मुझे नहीं पता।"
ड्राइवर ने बताया, "वह एफ-टीवी जैसे क्लबों के पास जाया करती थीं। उनकी एक खास आदत थी कि जब वह अपनी गाड़ी लेकर निकलती थीं, तो गाड़ी में म्यूजिक की आवाज तेज कर देती थीं और शीशे नीचे कर लेती थीं। उनकी गाड़ी पूरी तरह जेट ब्लैक रंग की थी और ऑटोमैटिक थी।" ड्राइवर के मुताबिक, "उनका मकसद शायद लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना था, ताकि वह लोगों को देखकर यह जान सकें कि श्रद्धा दुबे यहां आई हैं। वह ऐसी जगहों पर रुकना पसंद करती थीं, जहां अच्छी-खासी भीड़ हो, अच्छे लोग हों और बड़े-बड़े रसूखदार लोग बैठे हों। उनका नेटवर्क इतना मजबूत था कि वह पहले ही कैफे की लोकेशन और वहां मौजूद भीड़ के बारे में जानकारी हासिल कर लेती थीं।"
