Bundi Fake Mawa Milk Cake Factory Raid: त्योहारों के सीजन में बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर मिलावटखोरों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। बूंदी जिले के नमाना कस्बे में जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने एक कारखाने पर दबिश देकर बड़ी मात्रा में मावा, मिल्क केक और इन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की। कार्रवाई जिला डीएसटी प्रभारी बहादुर सिंह गौड़ के नेतृत्व में की गई। मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय की टीम, डीएसओ और नमाना थाना अधिकारी को भी बुलाया गया। कार्रवाई के दौरान बरामद सामग्री को मौके पर नष्ट करवाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री मिलने के बाद मिलावटखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
1084 किलो मावा और 355 डिब्बे मिल्क केक मिले
कार्रवाई के दौरान कारखाने से 1084 किलो मावा और मिल्क केक के 355 डिब्बे बरामद किए गए। इसके अलावा सूजी के 13 कट्टे, मिल्क केक बनाने की सामग्री के 16 कट्टे और पाम तेल के 7 पीपे भी मिले। टीम ने पूरी सामग्री को जब्त कर आगे की कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा विभाग की मौजूदगी में सामग्री को मौके पर नष्ट करवाया गया।
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में बड़ी मात्रा में मावा और मिल्क केक तैयार किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, बरामद मावे और मिठाइयों में किस प्रकार की मिलावट थी, इसकी पुष्टि संबंधित जांच और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकेगी।
खेत में बना रखा था कारखाना
जानकारी के अनुसार, दिनेश पुत्र जमनाशंकर तेली की ओर से खेत में कारखाना संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि यहां अलवर के करीब 10 कर्मचारियों के माध्यम से मावा तैयार कर मिल्क केक बनाया जा रहा था। आरोप है कि मिलावट वाली सामग्री का इस्तेमाल कर मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। इन उत्पादों को आगामी त्योहारों के दौरान बाजार में सप्लाई किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
कारखाने में इतनी बड़ी मात्रा में तैयार मावा, मिल्क केक और अन्य सामग्री मिलने के बाद पुलिस तथा खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई की। अब इस मामले में सामग्री की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और संबंधित नियमों की पालना से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण रहेगी। मिलावट की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर किया जाना है।
सूचना मिलते ही टीम ने की कार्रवाई
जिला डीएसटी प्रभारी बहादुर सिंह गौड़ के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय देखने को मिला। कारखाने से संबंधित सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और जांच की प्रक्रिया शुरू की। कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया, ताकि बरामद सामग्री के संबंध में आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
त्योहारों से पहले इस तरह की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ बाजार में अधिक मात्रा में खाद्य सामग्री पहुंचती है। ऐसे में निर्माण स्थलों और भंडारण केंद्रों की जांच करना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है।
जिलेभर में जारी रहेगा अभियान
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ओपी सामर ने बताया कि जिले में मिलावटखोरी पर रोक लगाने के लिए टीमें गठित कर विभिन्न स्थानों पर संचालित कारखानों की जांच करवाई जा रही है। जहां भी इस प्रकार की गतिविधियों की सूचना मिलती है, वहां टीम भेजकर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आगामी दिनों में भी इसी तरह जांच और कार्रवाई का अभियान जारी रहेगा। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मावा भंडारों, मिठाई बनाने वाले कारखानों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों पर निगरानी रखी जा रही है।
मिलावटखोरी पर निगरानी जरूरी
नमाना में हुई कार्रवाई ने एक बार फिर त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने की आवश्यकता को सामने रखा है। बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की शुद्धता सुनिश्चित करना संबंधित विभागों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए भी अहम है। बड़ी मात्रा में सामग्री की बरामदगी के बाद अब जांच के नतीजों और आगे होने वाली विभागीय कार्रवाई पर नजर रहेगी।
