छत्तीसगढ़ में मछली पालन व्यवसाय से आत्मनिर्भर हो रहे हैं लोग, हो रही है अच्छी कमाई

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 28, 2023, 05:46 PM IST

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित योजनाओं से लाभ उठाकर मछली पालन का कार्य करने वाले मछुआ सहकारी समिति के सदस्य आर्थिक संपन्नता की ओर बढ़ रहे हैं और स्वयं आत्मनिर्भर हो रहे हैं तथा अन्य लोगों को भी इस कार्य से रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित योजनाओं से लाभ उठाकर मछली पालन का कार्य करने वाले मछुआ सहकारी समिति के सदस्य आर्थिक संपन्नता की ओर बढ़ रहे हैं और स्वयं आत्मनिर्भर हो रहे हैं तथा अन्य लोगों को भी इस कार्य से रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। जिले के कटघोरा विकासखण्ड के ग्राम छुरीकला के कोसगाई दाई मछुआ सहकारी समिति विभागीय योजनाओं से जुड़कर मछली पालन का कार्य कर रहे है। समिति के सदस्य मछली पालन को अपने आय का प्रमुख जरिया बनाया है। समिति के सदस्यों ने सफलता प्राप्त की ही नही बल्कि अब वे अपने इस काम को नई ऊंचाईयां दे रही है। समिति के सदस्यों द्वारा कृषि कार्य के साथ-साथ मछली पालन का व्ययसाय भी किया जा रहा है। उन्हें मछली पालन विभाग द्वारा आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देकर मछली पालन के लिए प्रेरित किया गया, जिससे समिति के सदस्य इस कार्य में संलग्न होकर छुरी के भेलवाडबरा सिंचाई जलाशय को पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन का कार्य प्रारंभ किया। समिति द्वारा जलाशय में रोहू, कतला, मिरगल, ग्रासकार्प जैसे अन्य मछली बीज का संचयन किया गया है।

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छत्तीसगढ़ में मछली पालन बना रोजगार का साधन

दाई महुआ सहकारी समिति के अध्यक्ष आत्माराम केंवट ने बताया कि मत्स्य पालन कार्य से जुड़कर समिति के सदस्यों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, इससे उन्हें आमदनी का अतिरिक्त साधन प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा उन्हें योजना के तहत 3 लाख का अनुदान एवं सहायक सामग्री के रूप में मत्स्य बीज अंगुलिका, चटजाल, आईस बॉक्स इत्यादि सामग्री भी उपलब्ध कराया गया है। साथ ही उन्हें समय-समय पर आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। समिति के सदस्य मत्स्य बीज एवं जाल पाकर काफी उत्साहित हुए तथा मत्स्य पालन के प्रति रूचि लेने लगे, जिसका सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहा है।

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