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MP : नर्मदापुरम में दबंग पार्षद का कारनामा, जमीन कब्जा कर लगावाया मोबाइल टॉवर; RTI में RI ने किया खेल; अधिकारी नहीं ले रहे एक्शन

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम क्षेत्र के ग्वालटोली में स्थानीय BJP पार्षद पर आरोप है कि एक निजी जमीन पर कब्जा कर फर्जी तरीके से मोबाइल टॉवर लगवा दिया। पीड़ित की शिकायत के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई और आरटीआई के जरिए संबंधित आरआई ने गलत जानकारी पेश की।

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नर्मदापुरम टॉवर केस

नर्मदापुरम क्षेत्र के ग्वालटोली में स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षद ने एक निजी जमीन पर कब्जा कर फर्जी तरीके से मोबाइल टॉवर लगवा दिया। पीड़ित कई बार टॉवर हटाने के लिए अधिकारियों से शिकायत कर चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित का कहना है कि पिछले एक साल से नगर पालिका, तहसील, कलेक्ट्रट, जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन पर अपनी बात उठा चुका है। उन्होंने बताया कि जमीन रजिस्ट्री, खसरा समेत सभी मूल दस्तावेज होने के बाद भी अभी तक टॉवर नहीं हटाया गया है और तहसील से उनका प्रकरण भी खारिज कर दिया गया है।

पीड़ित दुलारे यादव का कहना है उन्होंने वार्ड-33 स्थित एपने प्लॉट के संबंध में एक आरटीआई लगाई। आरोप है कि आरटीआई गजेंद्र जाटव ने 6 मई 2025 को लिखकर दिया कि नर्मदापुरम स्थित नजूल शीट नंबर-30 पर कोई मोबाइल टॉवर नहीं बना रहा है, जबकि 21 मार्च 2025 को तहसीलदार को लिखे शिकायती पत्र में इसी आरआई ने बताया कि प्लॉट संख्या 3/21 अ (रकबा 35147.5 वर्गफुट) पर इंडस कंपनी का टॉवर निर्माण हो रहा है, जिसका अनुबंध तरुण चुटीले ने किया है। इतना ही नहीं आरआई ने लिखा था कि शीट नंबर 38 (सरकारी प्लॉट नं 2/1) और शीट नंबर 30 के बीच विवाद स्पष्ट होने तक निर्माण रोक लगाई जाए।

दुलारे यादव ने बताया कि उन्होंने 12 मार्च 2025 और 20 अगस्त 2025 को नगर पालिका नर्मदापुरम में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अतिरिक्त सीएम हेल्पलाइन पर 4 बार शिकायत की गई और जनसुनवाई में भी 11 मार्च, 18 मार्च और 18 मार्च को शिकायत कराई थी। हालांकि, जांच का भरोसा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कुछ भी नहीं हुआ।

दुलारे यादव ने कलेक्ट्रेट से आरटीआई के जरिए टॉवर की जानकारी मांगी थी। 6 मई 2025 को कलेक्ट्रेट ने लिखित में दिया कि वहां पर किसी प्रकार टॉवर जैसी चीज नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने 7 जुलाई 2025 को टॉवर की फोटो के साथ दोबारा जामकारी मांगी, लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी अबतक आरटीआई का कोई जवाब नहीं दिया गया।

तहसीलदार ने खारिज किया केस

पीड़िता का कहना है कि तहसील में 3 मार्च 2025 को अतिक्रमण संबंधी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके 9 महीने बाद तक पेशियां चली। लेकिन बाद में तहसीलदार हंसकुमार ओनकर ने 5 दिसंबर 2025 को यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि आवेदक पेशी पर नहीं आ रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि ऑर्डर शीट से 5 अगस्त 2025 के पेशी के रिकॉर्ड हटा दिए गए, जबकि उनके पास 12 अगस्त और 19 नवंबर को जारी नोटिस की कॉपी मौजूद है।

कार्रवाई न होने पर दुलारे यादव ने सवाल उठाया कि आरआई खुद कह रहे हैं कि टॉवर शीट नंबर 38, जो शासकीय भूमि पर लगा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारी जमीन पर टॉवर कैसे लगने दिया गया। मामले की जानकारी अधिकारियों को होने के बाद अभी तक एक्शन क्यों नहीं लिया है? इस चूक के बाद मामले में आरआई की भूमिका संदेह के घेरे में है। क्या आरआई पर कहीं से दबाव है या उसे कोई प्रलोभन मिला है, जिससे वह आरटीआई जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेज पर गलत जानकारी पेश कर रहा है। हालांकि, पार्षद पुत्र का कहना है कि जहां टॉवर लगा है वो जगह उनके नाम पट्टा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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