Mumbai News: मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार रात घोषणा करते हुए कहा कि आरक्षण के समर्थन में एक दिसंबर से महाराष्ट्र के सभी गांवों में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों पर समुदाय को आरक्षण के लाभ से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया।
मराठा आरक्षण आंदोलन 'निर्णायक चरण' तक पहुंच गया है
कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने ओबीसी श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर वह आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। जरांगे ने कहा कि यह आंदोलन 'निर्णायक चरण' में पहुंच गया है और समुदाय के सदस्य कानून के भीतर रहकर तथा अहिंसक तरीके से अपने अधिकार के लिए लड़ेंगे।
नवी मुंबई में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनका ध्यान भटकाने की कोशिश करने वालों की कोई भी भ्रामक रणनीति काम नहीं करेगी क्योंकि वह आरक्षण के लिए लड़ना जारी रखेंगे। जरांगे ने कहा, 'हमें आरक्षण से वंचित रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने एक सुनियोजित साजिश रची है।' महाराष्ट्र सरकार को आरक्षण का मुद्दा सुलझाने के लिए 24 दिसंबर तक का समय दिया है।
पहले भी कर चुके हैं अनशन
मराठा आरक्षण के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे इससे पहले भी अनशन पर बैठ चुके हैं। पिछली बार अक्टूबर के अंत में अनशन पर बैठे थे लेकिन 9 दिन बाद 2 नवंबर को उन्होंने अनशन वापस ले लिया था। सरकारी प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात के बाद जरांगे ने कहा कि 'हम सरकार को 2 जनवरी तक का समय देते हैं न्यायाधीश संदीप शिंदे समिति की रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए।' इसमें आगे जरांगे ने कहा कि ये आंदोलन जारी रहेगा, जब तक कि मराठा समुदायों को आरक्षण नहीं मिलेगा।
