Meerut News: मेरठ जिला जेल में बंद मुस्कान और रविता करवाचौथ को लेकर चर्चा में हैं। दोनों ने जेल में चूड़ियां और बिंदी मांगी हैं। संजीवनी महिला संस्था की ओर से महिला बंदियों को करवाचौथ की पूजा और श्रृंगार का सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, मुस्कान और रविता व्रत रखेंगी या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। जेल प्रशासन का कहना है कि महिला बंदियां जेल मैनुअल के नियमों के तहत व्रत रख सकती हैं और पूजा कर सकती हैं।
सलाखों के पीछे करवाचौथ की तैयारी, मुस्कान-रविता ने मांगा श्रृंगार का सामान।
महिला संस्था ने उपलब्ध कराया पूजा और श्रृंगार का सामान
सोमवार को संजीवनी महिला संस्था की टीम मेरठ जिला जेल पहुंची। संस्था की ओर से महिला बंदियों को करवाचौथ की पूजा के लिए मिट्टी के करवे और श्रृंगार का सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस दौरान महिला बंदियों से उनकी जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली गई। संस्था की सचिव पारुल बंसल के मुताबिक, मुस्कान और रविता ने चूड़ियां और बिंदी मांगी हैं। संस्था उनकी मांग के अनुसार सामान उपलब्ध करा रही है। हालांकि, दोनों करवाचौथ का व्रत रखेंगी या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है।
जेल मैनुअल के तहत रख सकती हैं व्रत
मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल में बंद महिला बंदियां अपनी इच्छा से करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार पूजा और फलाहार की व्यवस्था की जाती है।
उन्होंने बताया कि जिन महिला बंदियों के पति दूसरे शहरों में रहते हैं, वे पति की तस्वीर या उनकी किसी निशानी को सामने रखकर पूजा कर सकती हैं। यदि पति-पत्नी दोनों जेल में बंद हैं, तो नियमानुसार मुलाकात की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं, जेल से बाहर रहने वाले पति के आने पर भी निर्धारित नियमों के तहत मुलाकात कराई जाती है।
मुस्कान-साहिल और रविता-अमरदीप की मुलाकात नहीं हो सकती
जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान और साहिल के साथ-साथ रविता और अमरदीप को जेल में पति-पत्नी के तौर पर मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि वे पति-पत्नी नहीं हैं। जेल में मुलाकात की व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जाती है।
जेल में हुनर सीख रही हैं महिला बंदियां
संजीवनी महिला संस्था लंबे समय से महिला बंदियों के लिए सामाजिक कार्य कर रही है। संस्था की ओर से महिलाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग देने के साथ उनके बच्चों की पढ़ाई और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाते हैं।
संस्था की सचिव पारुल बंसल ने बताया कि महिला बंदियों को कंडील बनाना सिखाया गया है। कंडील बनाने का प्रशिक्षण लेने के लिए नाम लिखवाने वाली महिलाओं में मुस्कान का नाम भी शामिल था। इससे पहले मुस्कान ब्यूटीशियन का कोर्स भी सीख चुकी है। उसने जेल में राखी बनाना भी सीखा है।
