Nagpur: नागपुर जिले के ग्रामीण इलाके उमरेड वन क्षेत्र में पिछले चार महीनों से दहशत फैलाने वाली आदमखोर बाघिन को आखिरकार वन विभाग ने पकड़ने में सफलता हासिल की है। दो लोगों की जान लेने वाली इस बाघिन को पकड़ने के लिए कई दिनों से अभियान चलाया जा रहा था। इस पूरे अभियान में सबसे ज्यादा चर्चा महिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियल चौरागड़े के साहस की हो रही है।
बाघिन के साथ रेस्क्यू टीम
कैसे पूरा हुआ अभियान
इस अभियान का सबसे रोमांचक पल तब आया जब एक बाघिन को पकड़ने के लिए डॉ. प्रियल चौरागड़े ने खुद विशेष पिंजरे में बैठकर आदमखोर बाघिन को पकड़ने की जिम्मेदारी संभाली। जंगली जानवरों को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ना बेहद जोखिम भरा काम माना जाता है। खासकर ऐसी बाघिन को पकड़ना जो पहले ही दो लोगों की जान ले चुकी थी और बेहद सतर्क हो चुकी थी, अतिरिक्त जोखिम वाला काम था। बचाव दल के वाहन पीछे हटाने के बाद डॉ. चौरागड़े और उनके सहयोगी प्रतीक घाटे खास पिंजरे में बैठे। घने जंगल, सीमित विजिबिलिटी और किसी भी समय हमले की आशंका के बावजूद उन्होंने धैर्य बनाए रखा। जैसे ही बाघिन सामने आई, डॉ. प्रियल चौरागड़े ने डार्ट गन से सटीक निशाना लगाकर बेहोशी का इंजेक्शन दागा। करीब 15 मिनट बाद बाघिन बेहोश हो गई और वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित कब्जे में ले लिया।
दो लोगों को मार चुकी थी बाघिन
इस साहसिक अभियान के साथ डॉ. प्रियल चौरागड़े महाराष्ट्र में बाघ को डार्ट गन से बेहोश करने वाली पहली महिला पशु चिकित्सा अधिकारी बन गई हैं। करीब ढाई से तीन साल की उम्र वाली इस बाघिन ने 27 मार्च को निर्मला गभणे नाम के एक महिला और 6 जून को दिगंबर पाटील की खेत में काम करते समय जान ले ली थी। इसके अलावा कुछ लोगों के घायल होने से उमरेड क्षेत्र के ग्रामीणों में डर का माहौल था। बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग ने कैमरा ट्रैप, गश्त और अन्य कई उपाय किए, लेकिन बाघिन हर बार वनकर्मियों को चकमा दे रही थी। आखिरकार उसकी गतिविधियों का पता लगाकर विशेष रणनीति तैयार की गई और डॉ. प्रियल चौरागड़े के नेतृत्व वाली टीम ने इस अभियान को सफल बनाया। फिलहाल बाघिन को नागपुर स्थित ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में रखा गया है। वन विभाग के अनुसार उसकी हालत ठीक है।
