जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि 8 नवंबर तक बढ़ा दी है। प्रशासन ने कहा है कि दिवाली की छुट्टियों के बाद परिसर की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और उसी के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। इस बीच, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। उनकी मांग है कि विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करे।
जामिया में छात्र संघ बहाली की मांग तेज।
विश्वविद्यालय ने दूसरे मिड-टर्म सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन कराने का फैसला किया है। परीक्षा की तारीखों और दिशा-निर्देशों को संबंधित विभाग परीक्षा नियंत्रक के साथ विचार-विमर्श कर तय करेंगे। वहीं, पीएचडी शोधार्थियों को अपने सुपरवाइजर से ऑनलाइन संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर अड़े छात्र
जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को बहाल करने की मांग को लेकर छात्र कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को विश्वविद्यालय ने आदेश जारी कर कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का फैसला भी किया गया।हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने चुनाव की स्पष्ट तारीख घोषित होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। उनका कहना है कि चुनाव की समयसीमा और प्रक्रिया को लेकर ठोस आश्वासन दिया जाना चाहिए।
पूर्व छात्रों ने भी आंदोलन को दिया समर्थन
जामिया कलेक्टिव की ओर से जामिया नगर स्थित सैयदा मंजिल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों और विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने आंदोलन के मुद्दों पर अपनी बात रखी। वक्ताओं ने कहा कि परिसर में करीब दो दशक से निर्वाचित छात्र संघ नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी और छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी चिंता जताई।
जामिया की पूर्व छात्रा समीना मिश्रा ने परिसर में लोकतांत्रिक गतिविधियों और छात्र प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े छात्र प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।
सुरक्षा सलाहकार का पद खत्म करने और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के सुरक्षा सलाहकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस पद का इस्तेमाल आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों की निगरानी के लिए किया जा रहा है। छात्रों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ी शिकायतें प्रॉक्टर कार्यालय तक पहुंचाई जा रही हैं। छात्रों ने सुरक्षा सलाहकार का पद समाप्त करने और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद हैं। छात्रों के मुताबिक, मौजूदा तनाव के कारण कैंटीन और पुस्तकालय भी बंद हैं।छात्र संघ के संविधान में प्रतिनिधित्व की मांग
छात्रों ने मांग की कि छात्र संघ का संविधान तैयार करने वाली समिति में विद्यार्थियों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग भी उठाई गई। विश्वविद्यालय प्रशासन इससे पहले छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा कर चुका है। प्रशासन ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन से संबंधित मामलों में छात्रों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।
2006 के बाद से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव
छात्र संघ की बहाली को लेकर आंदोलन इसी महीने शुरू हुआ था। विद्यार्थियों का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। आंदोलन के दौरान चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। छात्रों और पूर्व विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और निर्वाचित प्रतिनिधि संस्था बहाल करने के लिए स्पष्ट समयसीमा देनी चाहिए। उनका तर्क है कि छात्र संघ विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
