'रामलला जैसा न हो हनुमान लला का हाल', प्रतिमा हटाने का प्रयास न करे सरकार; 'खड़े हनुमान मंदिर' मुद्दे पर बोलीं हर्षानंद गिरी

हर्षानंद गिरी ने कहा कि अलग-अलग राज्यों और शहरों से श्रद्धालु खड़े हनुमान मंदिर पहुंच रहे हैं। लोग यहां झाड़ा लगवा रहे हैं और ताबीज पहन रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की जिस तरह की आस्था इस स्थान से जुड़ी है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

उज्जैन : प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब साधु-संतों की मौजूदगी और बयान सामने आने लगे हैं। गुरुवार को प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं हर्षानंद गिरी भी खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने बटुकों और अन्य साधु-संतों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर को लेकर अपनी बात रखी और साधु-संत समाज से सामने आने की अपील की। मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल पर हर्षानंद गिरी ने कहा कि प्रतिमा के दोनों तरफ करीब सात फीट के गड्ढे खुदे हुए थे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ये 'गड्ढे कोई कुत्ता' अपने पंजों से तो नहीं खोद सकता। उनके मुताबिक वहां मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है और प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश की गई है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने प्रतिमा को किसी तरह की क्षति न पहुंचे और उसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सके, इसके लिए पूरी कोशिश की है और वह इस कोशिश का सम्मान करती हैं। लेकिन उनका कहना है कि सरकार चार प्रयास कर चुकी है और अब पांचवां प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां हनुमान जी का मंदिर तोड़ा गया है, अब वहीं दोबारा मंदिर का निर्माण किया जाए। मंदिर को और भव्य बनाने की भी मांग उन्होंने रखी।

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