गुजरात के बनासकांठा में एक मासूम के अपहरण से शुरू हुई जांच ने देशभर में फैले चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा कर दिया। 6 अप्रैल को धानपुरा गांव से चॉकलेट का लालच देकर बच्चे के अपहरण के बाद पुलिस हरकत में आई और महज 4-5 घंटे के भीतर पहला आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया।
नेशनल ट्रैफिकिंग नेटवर्क का हुआ खुलासा।
आंध्र प्रदेश की जेल में बंद महिला थी नेटवर्क की आका
जिला एसपी प्रशांत सुम्बे के नेतृत्व में एसआईटी, एसओजी, एलसीबी और स्थानीय पुलिस की कुल 10 टीमों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। शुरुआती पूछताछ में ही दूसरे आरोपी का सुराग मिला और उसकी गिरफ्तारी के साथ यह साफ हो गया कि मामला स्थानीय नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा है। जांच का दायरा बढ़ते-बढ़ते हैदराबाद तक पहुंच गया, जहां तीसरे आरोपी को मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेस-वे से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद भी बरामद हुए। पूछताछ में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस पूरे रैकेट को एक महिला संचालित कर रही थी, जो खुद आंध्र प्रदेश की जेल में बंद है और वहीं से पूरे नेटवर्क को कंट्रोल कर रही थी।
पुलिस के जाल में ऐसे फंसा मुरगन
आरोपी मूल रूप से अरवल्ली क्षेत्र के रहने वाले हैं और उनका काम बच्चों का अपहरण कर उन्हें अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करना था। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस कागजनगर पहुंची, जहां गिरोह का अहम सदस्य ‘मुरगन’ सामने आया। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया और AI आधारित जाल बिछाया। पुलिस ने एक फर्जी ‘ट्रैप’ तैयार किया, जिसमें ऐसा माहौल बनाया गया जैसे किसी बच्चे की डील होने वाली हो। मुरगन इस जाल में फंस गया और जैसे ही उसने लोकेशन शेयर की, पुलिस ने उसे दबोच लिया। उसके साथ दो अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए गए। खास बात यह है कि मुरगन पहले भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका था।
अब तक गिरोह ने की 8 बच्चों की तस्करी
पूछताछ में सामने आया कि अब तक इस गिरोह द्वारा 8 बच्चों की तस्करी की जा चुकी है, जिनमें 2 बनासकांठा, 2 मुंबई, 2 हैदराबाद और 1 दिल्ली से जुड़े मामले शामिल हैं। सभी बच्चों की तलाश जारी है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी पहले IVF सेंटर में कमीशन पर काम करते थे, लेकिन ज्यादा कमाई के लालच में उन्होंने नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त का रास्ता अपना लिया।
फिलहाल पुलिस ने इस नेशनल चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी की तलाश तेज कर दी गई है। यह मामला न सिर्फ संगठित अपराध की गंभीरता को दिखाता है, बल्कि तकनीक के जरिए पुलिस की बदलती कार्यशैली का भी उदाहरण है।
