ग्रेटर नोएडा के ‘ग्रैंड वेनेजिया’ प्रोजेक्ट से जुड़े विवाद में रियल एस्टेट प्रमोटर सतिंदर सिंह भसीन की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। निवेशकों ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्होंने अब तक सरेंडर नहीं किया है। इस पर निवेशकों ने सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल कर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने और अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
कोर्ट (सांकेतिक फोटो-Istock)
जमानत रद्द होने के बाद भी नहीं किया आत्मसमर्पण
सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को भसीन की जमानत रद्द करते हुए उन्हें एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि वे निर्धारित समय में आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो यूपी पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे। निवेशकों का कहना है कि तय समयसीमा 9 अप्रैल को समाप्त हो गई, लेकिन इसके बावजूद न तो भसीन ने आत्मसमर्पण किया और न ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया।
समय बढ़ाने की मांग भी खारिज हुई थी
याचिका में कहा गया है कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने भसीन की समय बढ़ाने की मांग को भी खारिज कर दिया था। इसके बावजूद उन्होंने सरेंडर नहीं किया और अन्य कानूनी उपायों के जरिए मामले को लंबा खींचने की कोशिश की।निवेशकों के मुताबिक, यह आचरण अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
अर्जी में यूपी पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। निवेशकों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद गिरफ्तारी की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही यह आशंका भी जताई गई है कि भसीन देश छोड़ सकते हैं या छोड़ चुके हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि भसीन ने अपने खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और लंबित मामलों की जानकारी अदालत से छिपाई। निवेशकों के मुताबिक, यह आचरण उनकी नीयत पर सवाल खड़ा करता है।
प्रोजेक्ट में धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं भसीन पर
‘ग्रैंड वेनेजिया’ प्रोजेक्ट के निवेशकों ने भसीन पर धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन और आवंटन में अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। भसीन को 2019 में जमानत मिली थी, लेकिन शर्तों के उल्लंघन के चलते सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी।
क्या मांग कर रहे हैं निवेशक?
निवेशकों ने अपनी अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि भसीन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए और अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। इसके साथ ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया जाए और उन्हें तत्काल हिरासत में लिया जाए। इस मामले में एक अन्य निवेशक ने भी अलग से आवेदन दाखिल कर 2 अप्रैल के आदेश को तुरंत लागू कराने और अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
